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सुप्रीम कोर्ट: MMRCLकी दलीलें खारिज, शीर्ष अदालत ने गरीब कैदियों को लेकर जेल अधिकारियों को दिया ये निर्देश

Tue, 29 Nov 2022 10:24 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुर्मू ने न्यायपालिका से यह कहते गरीब आदिवासियों के लिए कुछ करने का आग्रह किया था कि गंभीर अपराधों के आरोपी जमानत पर छूट जाते हैं, लेकिन केवल थप्पड़ मारने जैसे अपराधों के कारण कई गरीब कैदी जेलों में बंद हैं। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हाल ही में आदिवासियों की दुर्दशा का जिक्र करते भाषण देते वक्त भावुक हो गईं थीं। मुर्मू, जमानत के बावजूद छोटे-मोटे अपराधों में जेलों में बंद आदिवासियों की बात कर रहीं थीं। इसके कुछ दिनों बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देशभर के जेल अधिकारियों को ऐसे कैदियों की रिहाई के लिए राष्ट्रीय योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने नालसा (राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण) को पंद्रह दिनों के भीतर उनका विवरण उपलब्ध कराने को कहा है।  

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संविधान दिवस के मौके पर राष्ट्रपति ने झारखंड और ओडिशा के गरीब आदिवासियों की दुर्दशा का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि जमानत राशि भरने या व्यवस्था करने के लिए पैसे की कमी के कारण जमानत मिलने के बावजदू वे जेलों में कैद में हैं। 

मुर्मू ने न्यायपालिका से यह कहते गरीब आदिवासियों के लिए कुछ करने का आग्रह किया था कि गंभीर अपराधों के आरोपी जमानत पर छूट जाते हैं, लेकिन केवल थप्पड़ मारने जैसे अपराधों के कारण कई गरीब कैदी जेलों में बंद हैं। 
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जब राष्ट्रपति ने अपने भाषण में ओडिशा में एक विधायक और झारखंड में राज्यपाल के रूप में कई विचाराधीन कैदियों से मिलने का अनुभव बताया था, तब मंच पर चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस एस. के. कौल मंच पर बैठे थे। जस्टिस कौल और अभय एस. ओका की पीठ ने मंगलवार को जेल अधिकारियों को ऐसे कैदियों का विवरण संबंधित राज्य सरकारों को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जो पंद्रह दिनों के भीतर दस्तावेजों को नालसा को भेजेंगे। 

कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री के हत्या मामले को ट्रांसफर किया
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की कथित हत्या से जुड़े मामले को राज्य की एक स्थानीय अदालत से हैदराबाद स्थानांतरित कर दिया। 

दरअसल, मृतक विवेकानंद रेड्डी की बेटी के द्वारा मामले को स्थानांतरित करने की याचिका दाखिल की गई थी। जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कहा, निष्पक्ष सुनवाई को सुनिश्चित करने को लेकर उनकी पत्नी और बेटी की आशंकाएं वाजिब हैं। 

शीर्ष कोर्ट ने कहा, मृत की बेटी और पत्नी होने के नाते याचिकाकर्ता का मौलिक अधिकार है और उनकी अपेक्षा वैध है कि आपराधिक मुकदमा निष्पक्ष तरीके से चलाया जाए। आंध्र प्रदेश की हाईकोर्ट के आदेश के बाद जुलाई 2020 में सीबीआई ने जांच को अपने हाथों में लिया था। मामला पहले कडप्पा के पुलिस स्टेशन पुलिवेंदुला में दर्ज किया गया था। पूर्व सांसद विवेकानंद रेड्डी की 2019 के आम चुनाव से एक महीने पहले 15 मार्च को उनके आवास पर हत्या कर दी गई थी।  

सुप्रीम कोर्ट ने एमएमआरसीएल की दलीलों को किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) की उन दलीलों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि मेट्रो लोगों को कारों का इस्तेमाल न करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।  

चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने एमएमआरसीएल को आरे मेट्रो कार शेड परियोजना के लिए 84 पेड़ों  को काटने के लिए वृक्ष प्राधिकरण के समक्ष आवेदन देकर अनुमति लेने को कहा। 
 
सुनवाई के दौरान एमएमआरसीएल की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने मेट्रो रेल परियोजना के लाभों और प्रभावों को सूचीबद्ध करते हुए कहा कि कम वाहनों के आवागमन के कारण कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, तेरह लाख से ज्यादा यात्री मेट्रो के जरिए यात्रा कर सकते हैं। इससे यातायात की स्थिति में सुधार आ सकता है। कारों की कम संख्या, ईंधन की खपत में कमी हो सकती है। मेहता ने कहा, हर दिन मुंबई में ट्रेन दुर्घटनाओं में नौ लोग मारे जाते हैं। 

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