हिमाचल प्रदेश में विधायकों और सांसदों से जुड़े 45 आपराधिक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया है। ये मामले कोरोना काल की रैलियों से जुड़े हैं। अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है, जिसमें राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी है। यह आदेश विधायकों और सांसदों से जुड़े 45 आपराधिक मामलों को वापस लेने से रोकने से जुड़ा है। इन मामलों में वे केस भी शामिल हैं, जो कोरोना काल के दौरान रैलियां करने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पिछली भाजपा सरकार के समय दर्ज किए गए थे। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया है और अगली सुनवाई की तारीख 16 मार्च तय की है।
कौन-कौन से मामले वापस लेने से रोका गया?
हाई कोर्ट ने IPC की धाराओं 269 (बीमारी फैलने का खतरा), 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (धमकी), और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम व आपदा प्रबंधन कानून से जुड़े मामलों को वापस लेने से मना किया था।
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कानूनी वजह क्या बताई गई?
हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही CrPC की धारा 321 के तहत पहले अनुमति जरूरी नहीं थी, लेकिन 2020 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद अब विधायकों और सांसदों से जुड़े मामलों में कोर्ट की अनुमति जरूरी है।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि केस वापस लेने का फैसला राजनीतिक वजहों से नहीं, बल्कि सच्चे जनहित में और ईमानदारी से होना चाहिए।
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