ठोस कचरा प्रबंधन पर राज्यों को सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को आदेश दिया कि वे ठोस कचरे के 100% संग्रह और छंटाई (सेग्रिगेशन) की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति करें। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि राज्यों को चाहिए कि वे जमीनी हकीकत के आधार पर यह आकलन करें कि कितना कचरा पैदा हो रहा है और यह भी तय करें कि यह लक्ष्य (100% कचरा प्रबंधन) कब तक पूरा किया जाएगा।
कोर्ट ने कहा, इन दोनों मुद्दों से जुड़े नोडल अधिकारी हर तीन महीने में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें, जिसकी शुरुआत 1 सितंबर 2025 से हो। सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि ये रिपोर्ट उस बेंच तक पहुंचे जो इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने ये भी कहा, जब तक 2016 के ठोस कचरा प्रबंधन नियमों की जानकारी ठीक से नहीं दी जाती और पालन न करने पर सजा तय नहीं होती, तब तक ये नियम प्रभावी नहीं हो सकते। इसलिए, एनसीआर के सभी राज्य और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाएं।
प्रयागराज के ‘मानसरोवर पैलेस’ सिनेमाहॉल का कब्जा असली मालिक को सौंपा जाए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज में ‘मानसरोवर पैलेस’ सिनेमा हॉल का कब्जा असली मालिक के परिजन को सौंपने का आदेश देकर 63 साल पुराने किरायेदारी विवाद का निपटारा कर दिया। शीर्ष अदालत ने प्रतिवादियों को परिसर खाली करने और वाद परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने के लिए 31 दिसंबर, 2025 तक का समय दिया।
जस्टिस एमएम सुंदरेश व जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा, हम सिनेमा हॉल से संबंधित इस लंबे समय से चल रहे मुकदमे पर आखिरकार पर्दा डालते हैं। अपील स्वीकार करते हुए कहा कि 1999 के रिट में 9 जनवरी 2013 को उच्च न्यायालय के फैसले और आदेश को रद्द किया जाता है। अदालत ने कहा है कि 31 दिसंबर, 2025 तक किरायेदार सिनेमा हाल को मालिक को सौंप दे। यह प्रतिवादियों की ओर से सामान्य वचनबद्धता दाखिल करने व फैसले की तारीख से चार सप्ताह के भीतर किराए/उपयोग और कब्जे के सभी बकाया (यदि कोई हो) का भुगतान करने के अधीन होगा। इस कानूनी लड़ाई में दो दौर की मुकदमेबाजी हुई। अंततः स्वर्गीय मुरलीधर अग्रवाल के कानूनी उत्तराधिकारी अतुल कुमार अग्रवाल ने केस जीत लिया और परिणामस्वरूप किरायेदार स्वर्गीय महेंद्र प्रताप काकन के कानूनी उत्तराधिकारियों को अब सिनेमा हॉल का कब्जा सौंपना होगा।