कर्नाटक में हनीट्रैप का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मामले में शीर्ष अदालत के समक्ष एक याचिका लगाई गई है और आरोपों की सीबीआई या एसआईटी से जांच की मांग की गई है। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें....
कर्नाटक में न्यायाधीशों और लोकसेवकों को हनीट्रैप में फंसाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोपों की सीबीआई या एसआईटी से जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की मांग की। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट याचिका को आज या कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमत है।
विज्ञापन
कर्नाटक के मंत्री भी हनीट्रैप में फंसे
चार दिन पहले कर्नाटक सरकार के सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना ने विधानसभा में दावा किया था कि केंद्रीय नेताओं समेत 48 राजनेता हनी ट्रैप में फंस गए हैं। राजन्ना ने कहा था कि 'कर्नाटक को सीडी और पेन ड्राइव फैक्ट्री कहा जा रहा है। पता चला है कि 48 लोगों की सीडी-पेन ड्राइव उपलब्ध हैं।नेटवर्क पूरे भारत में फैला है। कई केंद्रीय मंत्री भी फंसे हैं।' अन्य विधायकों ने भी मंत्री राजन्ना के बयान का समर्थन किया था। इसके बाद राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने का आश्वासन दिया।
मामले में गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा था हमें बस इतना पता है कि हमारी खुफिया एजेंसियों ने सैन्य खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर दीप राज चंद्र नामक व्यक्ति को कुछ जानकारी दी थी। पता चला कि वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के साथ हाल की घटनाओं और उपकरणों के रहस्यों के बारे में गोपनीय जानकारी साझा कर रहा था। अब सैन्य खुफिया एजेंसियां इस मामले को आगे ले जाएंगी।
विज्ञापन
विपक्ष ने की थी जांच की मांग
इसे लेकर विपक्ष ने जांच की मांग की। भाजपा विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि 'यह किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं है। यह लोगों के लिए काम करने वाले विधायकों के खिलाफ सबसे बड़ी साजिश है। कुछ लोग अपने छिपे हुए एजेंडे के तहत ये सब (हनीट्रैप) कर रहे हैं।' भाजपा विधायक बासनगौड़ा पाटिल ने राज्य के गृह मंत्री डॉ जी परमेश्वर से मांग की कि हनीट्रैप मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए ताकि इसकी निष्पक्ष जांच हो सके। उन्होंने इसे लेकर गृह मंत्री को पत्र लिखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी-दिल्ली के छात्रों की आत्महत्या की जांच के आदेश दिए
शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या के एक परेशान करने वाले पैटर्न को रेखांकित करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली पुलिस को एक एफआईआर दर्ज करने और एससी/एसटी समुदाय के दो आईआईटी-दिल्ली छात्रों की आत्महत्या की जांच करने का निर्देश दिया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने डीसीपी (दक्षिण-पश्चिम जिला) को एफआईआर दर्ज करने और सहायक पुलिस आयुक्त के पद से नीचे के अधिकारी को जांच करने के लिए नियुक्त करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, 'हमें आगे कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है क्योंकि किसी भी अपराध की जांच पुलिस के अधिकार क्षेत्र में है।' अदालत ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा और कल्याण को बनाए रखने की जिम्मेदारी हर शैक्षणिक संस्थान के प्रशासन पर है। 'इसलिए, परिसर में आत्महत्या जैसी किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की स्थिति में, उचित अधिकारियों के पास तुरंत एफआईआर दर्ज कराना उनका स्पष्ट कर्तव्य बन जाता है,' अदालत ने आगे कहा, 'ऐसी कार्रवाई न केवल एक कानूनी दायित्व है, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय की खोज सुनिश्चित करने के लिए एक नैतिक अनिवार्यता भी है। साथ ही, पुलिस अधिकारियों पर बिना किसी इनकार या देरी के एफआईआर दर्ज करके परिश्रम और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का दायित्व है।'
SC ने कर्नाटक की जिला अदालतों के बार निकायों में महिला वकीलों के लिए आरक्षण का दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक की जिला अदालतों के बार निकायों की परिषद की कार्यकारी समिति में 30 प्रतिशत सीटों के साथ-साथ कोषाध्यक्ष का पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया। जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि बेंगलुरु एडवोकेट एसोसिएशन के मामले में पारित उसका निर्देश कर्नाटक की जिला अदालतों के मामले में भी लागू होगा।
बंगलूरू की महिला वकीलों की तरफ से 24 जनवरी को बेंगलुरु एडवोकेट एसोसिएशन के मामले में पारित इसी तरह के निर्देश की मांग के बाद शीर्ष अदालत का यह आदेश आया, जिसमें अदालत ने महिला वकीलों के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की थीं। महिला वकीलों की ओर से पेश वकील ने कहा कि हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के लिए चुनाव हुए और कोषाध्यक्ष का पद एक महिला उम्मीदवार ने जीता। 24 जनवरी को अपनी पूर्ण शक्तियों का प्रयोग करते हुए शीर्ष अदालत ने बेंगलुरु एडवोकेट एसोसिएशन (एएबी) में कोषाध्यक्ष का पद महिला वकीलों के लिए आरक्षित कर दिया।
न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि अधिवक्ताओं के कई निर्वाचित निकायों में महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने का यह उचित समय है और संघ की महिला उम्मीदवारों के लिए सीटें निर्धारित करने के लिए ज्ञापन और उपनियमों में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। पीठ ने चुनाव की निगरानी के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति और बार निकाय चुनावों के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नामांकन आमंत्रित करने की तिथि बढ़ाने और यदि आवश्यक हो, तो चुनाव को कुछ दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया।
30 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आंध्र प्रदेश के भूस्वामियों को सुप्रीम राहत, 70 लाख मिलेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने करीब 30 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आंध्र प्रदेश सरकार से निजी भूमि मालिकों के एक समूह को कुरनूल जिले में उनकी 3.34 एकड़ से अधिक जमीन से बेदखल करने के लिए 70 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून का उद्देश्य न्याय को आगे बढ़ाना है। साथ ही भूमि विवादों में निजी व्यक्तियों के कानूनी नोटिसों का जवाब देने में राज्य अधिकारियों के गैर-गंभीर दृष्टिकोण की आलोचना की। जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस आर महादेवन ने कहा कि वह राज्य अधिकारियों को अपीलकर्ताओं को जमीन पर कब्जा वापस दिलाने का निर्देश दे सकती थी, लेकिन ऐसा आदेश पारित करने के लिए बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि निर्माण 30 साल पहले पूरा हो गया था।
अदालतों के साथ हो रहे व्यवहार को नजरअंदाज नहीं कर सकते
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में 1996 की पेंशन लाभ योजना को लागू करने में पंजाब सरकार की निष्क्रियता पर कड़ी आपत्ति जताई। जस्टिस अभय एस ओका व जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि अदालतों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। अगर राज्य सरकार इस योजना को लागू करने में विफल रहती है तो कोर्ट अपने स्तर पर लाभार्थियों को आर्थिक लाभ प्रदान करेगा। जस्टिस ओका ने राज्य सरकारों के निर्देशों का पालन नहीं करने पर नाराजगी जताई और कहा कि राज्य को इसका उत्तर देना चाहिए। हम यह दर्ज करेंगे कि राज्य के किसी भी अधिकारी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। राज्य ने अदालत को धोखा दिया है। पीठ ने पंजाब के वकील को राज्य सरकार से निर्देश लेने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई इस साल 1 अप्रैल को तय की। शीर्ष अदालत ने इस वर्ष 5 मार्च को पंजाब के मुख्य सचिव को 1996 की पेंशन लाभ योजना को लागू करने में विफल रहने और इसे लागू करने के वचन का उल्लंघन करने के लिए अवमानना नोटिस जारी किया था।
पंजाब निकाय चुनाव : शिकायतों की जांच के लिए होगी पूर्व जज की नियुक्ति
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पंजाब नगर निकाय चुनावों के पीड़ित उम्मीदवारों की शिकायतों की जांच करने के लिए हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज को नियुक्त करेगा। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की की पीठ ने पंजाब सरकार और नगर निकाय चुनावों के परिणाम को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं से एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के जज का सुझाव मांगा। पीठ ने पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह से कहा, यह जनता की आस्था और भरोसे का सवाल है। जो अधिकारी शीर्ष पर हैं, अगर उनके खिलाफ कोई आरोप लगाया जाता है, तो वे शिकायतों पर गौर नहीं कर सकते। वह एक-दो दिन में एक व्यक्ति वाली तथ्य खोज समिति के नियम और संदर्भ देते हुए विस्तृत आदेश पारित करेगी। समिति का मुख्यालय चंडीगढ़ में होगा, जहां केवल वे याचिकाकर्ता ही अपने दावे और प्रतिदावे कर सकते हैं, जिन्होंने दिसंबर 2024-जनवरी 2025 के नगर निकाय चुनावों के खिलाफ शिकायतों के साथ हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।