अदालतों के आधुनिकीकरण के लिए न्यायिक ढांचे की समिति ने सौंपी कार्ययोजना
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की ओर से गठित उच्चस्तरीय न्यायिक ढांचा समिति ने देशभर की अदालतों के आधुनिकीकरण के लिए कार्ययोजना वाली अंतरिम रिपोर्ट सोमवार को उन्हें सौंप दी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली न्यायिक ढांचा सलाहकार समिति ने 12 मई को गठन के करीब चार महीने बाद यह रिपोर्ट सौंपी है। समिति में कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति देबांग्शु बसाक, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और बंबई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरसन शामिल हैं। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के महानिदेशक सतींदर पाल सिंह और सुप्रीम कोर्ट के महासचिव भारत पाराशर, जो समिति के सदस्य सचिव भी हैं, भी इसका हिस्सा थे। समिति का गठन विभिन्न हाईकोर्ट और जिला अदालतों की अलग-अलग ढांचागत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया था।
आधुनिक अदालत परिसरों से लेकर ई-न्याय व्यवस्था तक पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि समिति ने अदालतों की ढांचागत कमियों को दूर करने के लिए सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहयोग हासिल करने पर आधारित खाका तैयार किया है। इसमें न्यायाधीशों, अदालत कर्मचारियों, वकीलों, वादकारियों और आगंतुकों के लिए जरूरी सुविधाओं की पहचान करना, अदालतों के कंप्यूटरीकरण के लिए ई-कोर्ट पहल के तहत उपाय सुझाना, नागरिक केंद्रित सेवाओं के जरिए न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाना और डिजिटल खाई पाटने के कदम शामिल हैं। समिति ने आधुनिक अदालत परिसरों की स्थापना और न्यायिक व प्रशासनिक कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों में सुधार के उपायों पर भी विचार किया। मई में समिति के गठन के समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसका उद्देश्य देशभर में एकीकृत ढांचागत व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें हाईकोर्ट और जिला अदालतों की अलग-अलग जरूरतों का ध्यान रखा जाए। अंतरिम रिपोर्ट पर CJI आगे विचार करेंगे और इसके आधार पर केंद्र तथा राज्य सरकारों के साथ न्यायिक ढांचे के लिए धन आवंटन को लेकर चर्चा की जाएगी।