विकास कार्य करते समय पर्यावरण की रक्षा करना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विकास कार्य करते समय पर्यावरण की रक्षा भी जरूरी है। शीर्ष कोर्ट ने तेलंगाना सरकार को कांचा गाचीबोवली वन स्थल के समग्र पुनरुद्धार के लिए बेहतर प्रस्ताव पेश करने को 6 हफ्ते का समय दिया। सीजेआई जस्टिस बीआर गवई व जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि राज्य को काटे गए पेड़ों की जगह नए पेड़ लगाने होेेंगे। शीर्ष कोर्ट ने 15 मई को कहा था कि हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास पेड़ों की कटाई प्रथम दृष्टया पूर्व नियोजित प्रतीत होती है। सीजेआई ने कहा था कि यह सरकार पर है कि वह जंगल बहाल करे या अफसरों को जेल भेजे। बता दें कि कांचा गाचीबोवली वनक्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शीर्ष कोर्ट ने 3 अप्रैल को अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के त्रिची जिले की थुरैयूर नगरपालिका को आईडीबीआई बैंक की एक शाखा की सील हटाने और उसे चालू रखने का निर्देश दिया। नगरपालिका ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के 6 अगस्त के आदेश के बाद परिसर को सील कर दिया था। हाईकोर्ट ने 48 घंटों के भीतर इसे सील करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने MP हाईकोर्ट पर जताई नाराजगी, पैरामेडिकल कोर्स पर आदेश रोका
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पर सख्त नाराजगी जताई। वजह यह रही कि हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल कोर्स के एडमिशन मामले में नए आदेश जारी कर दिए, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही उसके पुराने आदेश पर रोक लगा चुका था। 1 अगस्त को चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के रोक आदेश को हटाकर एडमिशन प्रक्रिया फिर से शुरू करने की मंजूरी दी थी। लेकिन इसके बाद भी हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई कर नए निर्देश दे दिए। सुप्रीम कोर्ट में पैरामेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, 'हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश नोट करने के बावजूद आगे आदेश जारी किए, यह चौंकाने वाला है।' CJI ने कहा, 'हमें हैरानी है कि हाईकोर्ट ने ऐसा किया। जब इस अदालत ने हाईकोर्ट के 16 जुलाई के आदेश पर रोक लगा दी थी, तब आगे निर्देश देना संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।' सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश और वहां चल रही कार्यवाही -दोनों पर रोक लगा दी।
मामला क्या है?
16 जुलाई को जबलपुर बेंच ने 2023–24 और 2024–25 के पैरामेडिकल कोर्स की एडमिशन प्रक्रिया रोक दी थी। यह याचिका कुछ लॉ स्टूडेंट्स ने लगाई थी, जिनका इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं था। हाईकोर्ट ने पाया कि 166 पैरामेडिकल संस्थानों को 2025 में मान्यता देकर 2023–24 का कोर्स शुरू करने की इजाजत दी गई, जो तर्कहीन है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब संस्थान 2023 में अस्तित्व में ही नहीं थे, तो वे 2023–24 का कोर्स 2025 में कैसे चला सकते हैं। पैरामेडिकल काउंसिल का कहना है कि कोविड महामारी के कारण कई कोर्स समय पर शुरू नहीं हो सके और मान्यता व एडमिशन की प्रक्रिया में देरी हुई