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Supreme Court: 'जमानत मसले में CBI जांच का आदेश नहीं दे सकता हाईकोर्ट', नीट-2021 काउंसलिंग केस में शीर्ष अदालत

Wed, 26 Mar 2025 07:47 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट में नीट-2021 काउंसलिंग मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों को गौर से सुना और दलीलों को मद्देनजर रखते हुए उच्च न्यायालय का फैसला रद्द कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से दिए गए सीबीआई जांच के निर्देश को रद्द कर दिया। नीट-2021 काउंसलिंग से अयोग्य उम्मीदवारों के प्रवेश से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत मामले में हाईकोर्ट की ओर से सीबीआई जांच का कोई निर्देश तब तक नहीं दिए जा सकते, जब तक कि असाधारण परिस्थितियां स्पष्ट रूप से स्थापित न हों।

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केवल सीबीआई को निर्देश देने की सीमा तक हस्तक्षेप
जस्टिस सुधांशु धूलिया व जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में केवल सीबीआई को निर्देश देने की सीमा तक हस्तक्षेप किया, क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपी डॉ. रितु गर्ग की जमानत पर कोई आपत्ति नहीं जताई। पीठ ने कहा, हमने जांच से जुड़े तथ्यों पर गौर करने से परहेज किया है, ताकि किसी भी तरह से जांच में बाधा न आए।

यह भी पढ़ें- उन्नाव दुष्कर्म मामले जुड़े लोगों और गवाहों को दी गई सीआरपीएफ सुरक्षा वापस, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
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निर्देश की वैधता पर सवाल उठाया था
यूपी सरकार की पैरवी करने वाले एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश की ओर से सीबीआई को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 161 के तहत डॉ. उमाकांत के बयान के आधार पर मामला दर्ज करने व जमानत आवेदन की जांच करने के निर्देश की वैधता पर सवाल उठाया था।

आरोपों की वरिष्ठ अधिकारियों से पुष्टि नहीं की गई थी
पीठ ने नोट किया कि हाईकोर्ट ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली थी, पर सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दिए गए बयान व जांच अधिकारी के समक्ष इसका सामना करने के आधार पर सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच अधिकारी ने यह भी कहा कि आरोपों की वरिष्ठ अधिकारियों से पुष्टि नहीं की गई थी।
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'मिसालों से बंधे हैं'
पीठ ने कहा, हमें डर है कि बयान या कोर्ट में मौजूद जांच अधिकारी की ओर से रिकॉर्ड की पुष्टि किए बिना दिए बयान से कोई असाधारण परिस्थिति सामने नहीं आई है। हम उन मिसालों से भी बंधे हैं, जो स्पष्ट रूप से मानते हैं कि जमानत याचिका में ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है।

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