फ्लिपकार्ट को एकाधिकार बनाने में महारत, हमें छोटी कंपनियों की चिंता; शीर्ष अदालत करेगी एकाधिकार बनाने के मुद्दे की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ई-कॉमर्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी फ्लिपकार्ट एकाधिकार बनाने के लिए जानी जाती है। उसे इसमें महारत हासिल है। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसे बाजार में छोटी कंपनियों के भविष्य को लेकर चिंता है। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के आदेश से शुरू हुए विवाद के निपटारे में मदद के लिए वकील उदयादित्य बनर्जी को न्यायमित्र नियुक्त किया। एनसीएलएटी ने निष्पक्ष व्यापार नियामक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को फ्लिपकार्ट के खिलाफ उसके प्रभुत्वपूर्ण स्थिति के दुरुपयोग के लिए जांच शुरू करने को कहा था। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि फ्लिपकार्ट पर अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाने वाले शिकायतकर्ता ऑल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन (एआईओवीए) का कहीं पता नहीं चला। उसके वकीलों को संस्था से कोई निर्देश नहीं मिला था। एआईओवीए की ओर से पेश अधिवक्ता उदयादित्य बनर्जी ने कहा कि यह संभव है कि संगठन को भंग कर दिया गया हो या अब उसका अस्तित्व ही न हो। पीठ ने फ्लिपकार्ट के वकील से कहा कि वह एकाधिकार बनाने के मुद्दे की जांच करना चाहेगी। फ्लिपकार्ट के वकील ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म की वजह से कई छोटे विक्रेता अपने कारोबार को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने में सक्षम हुए हैं। इस पर जस्टिस कांत ने कहा, कभी-कभी फ्लिपकार्ट इतनी अधिक छूट देता है कि इससे छोटे कारोबारियों का कारोबार और बाजार का संतुलन बिगड़ जाता है। पीठ ने वकील उदयादित्य बनर्जी से इस मामले में न्यायालय की मदद करने को कहा, अन्यथा यह एक असमान लड़ाई होगी।
आप किसी को उसकी विचारधारा के लिए जेल में नहीं डाल सकते : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केरल के पलक्कड़ जिले में आरएसएस नेता श्रीनिवासन की 2022 में हुई हत्या के आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि आप किसी को उसकी विचारधारा के लिए जेल में नहीं डाल सकते। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने पीएफआई की केरल इकाई के तत्कालीन महासचिव अब्दुल साथर को जमानत देते हुए पीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पेश हुए वकील से कहा, जहां तक श्रीनिवासन की हत्या का सवाल है, इसमें उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। आप किसी को उसकी विचारधारा के लिए जेल में नहीं डाल सकते। हम यही चलन देख रहे हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि उन्होंने एक खास विचारधारा अपना ली है, इसलिए उन्हें जेल में डाल दिया जाता है।
बता दें कि केरल हाईकोर्ट ने 25 जून, 2024 को 17 आरोपी पीएफआई सदस्यों को जमानत दे दी थी। ये सभी राज्य और देश के अन्य हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के आरोप में मुकदमे का सामना कर रहे थे। 26 आरोपियों में से 17 को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी के साथ उनके सेलफोन नंबर और रिअल टाइम जीपीएस लोकेशन साझा करने की कड़ी शर्त लगाई थी। उल्लेखनीय है कि 19 दिसंबर, 2022 को, केंद्र ने श्रीनिवासन की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि पीएफआई के नेताओं की ओर से बड़ी साजिश रची गई थी। इसके गंभीर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिणाम हैं। इसकी व्यापक साजिश का पता लगाने और अन्य आरोपियों की पहचान करने के लिए गहन जांच की आवश्यकता है। केंद्र ने एनआईए को हत्या के मामले की भी जांच करने का निर्देश दिया था। एजेंसी ने 2023 में अपनी समेकित चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद दो पूरक चार्जशीट दाखिल की गईं थी।
लोकतंत्र की समृद्धि के लिए उपभोक्ता मुकदमेबाजी को कई गुना बढ़ने दिया जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
उपभोक्ता मुकदमेबाजी को जनहित याचिका का एक रूप मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि लोकतंत्र के फलने-फूलने के लिए उपभोक्ता मुकदमेबाजी को कई गुना बढ़ने देना जरूरी है।जस्टिस अभय एस ओका व जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि उपभोक्तावाद को सशक्त बनाना सामाजिक असमानताओं को दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका होगा। शीर्ष अदालत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के कार्यान्वयन में खामियों का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा, उपभोक्ता मुकदमेबाजी से सक्रिय नागरिकता का निर्माण होता है और सहभागी लोकतंत्र आगे बढ़ता है। सहभागी लोकतंत्र संविधान की बुनियादी विशेषताओं में से एक है। देश के शासन में भागीदारी का सिद्धांत न सिर्फ सांविधानिक अधिकार है, बल्कि मानवाधिकार भी है। इसलिए जरूरी है कि लोकतंत्र को फलने-फूलने के लिए उपभोक्ता मुकदमेबाजी को कई गुना बढ़ने दिया जाए।