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SC: एल्गार परिषद मामले में आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर होगी सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने दी अनुमति

Fri, 08 Aug 2025 09:59 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

27 मार्च को न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार अधिवक्ता सुरेंद्र गाडलिंग और कार्यकर्ता ज्योति जगताप की जमानत पर सुनवाई स्थगित कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट 11 बार उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई टाल चुका है। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें....।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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एल्गार परिषद मामले में आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ से सुरेंद्र गाडलिंग के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने जमानत याचिका पर सुनवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि मेरे मुवक्किल 6.5 साल से जेल में है। सर्वोच्च न्यायालय में जमानत याचिका पर सुनवाई 11 बार स्थगित की जा चुकी है।"
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इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम इसे सूचीबद्ध करेंगे। इससे पहले 27 मार्च को न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने मामले में गिरफ्तार गडलिंग और कार्यकर्ता ज्योति जगताप की जमानत पर सुनवाई स्थगित कर दी थी। न्यायालय ने कार्यकर्ता महेश राउत को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की याचिका को भी स्थगित कर दिया था। यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गर परिषद सम्मेलन में कथित तौर पर दिए गए भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके कारण अगले दिन पुणे जिले के कोरेगांव-भीमा में हिंसा भड़क गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ऑटिज्म की स्थितियों वाले व्यक्तियों की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और अन्य से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें ऑटिज्म जैसी स्थितियों वाले व्यक्तियों के कल्याण को बनाए रखने में संस्थागत उदासीनता का आरोप लगाया गया है। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति केवी. विश्वनाथन की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की। याचिका में राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 सहित विभिन्न कानूनों के कार्यान्वयन में विफलता का दावा किया गया था। कानून का उद्देश्य ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी आदि और बहु विकलांगताओं से ग्रस्त व्यक्तियों के कल्याण से संबंधित है। याचिकाकर्ता संस्था एक्शन फॉर ऑटिज्म के वकील ने कहा कि हम आपका ध्यान ऑटिज्म, डिस्लेक्सिया जैसी न्यूरोडायवर्जेंट स्थितियों वाले व्यक्तियों के प्रति सांविधानिक, वैधानिक और अंतरराष्ट्रीय दायित्व को बनाए रखने में प्रतिवादियों की निरंतर उपेक्षा, संस्थागत उदासीनता और विफलता की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। इस पर पीठ ने कहा कि हम पहले पांच प्रतिवादियों (केंद्र और अन्य) को नोटिस जारी करेंगे। हम फिलहाल राज्यों को अलग रखेंगे। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त के लिए स्थगित कर दी।

धर्मस्थल मामले में मीडिया कवरेज रोकने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक के धर्मस्थल सामूहिक कब्र मामले पर मीडिया की रिपोर्टिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कर्नाटक की एक निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह धर्मस्थल मंदिर के सचिव द्वारा दायर याचिका पर नए सिरे से निर्णय ले। सचिव ने याचिका में मंदिर का प्रबंधन करने वाले परिवार को निशाना बनाने वाली कथित अपमानजनक सामग्री को हटाने की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि गैग आदेश केवल अत्यंत दुर्लभ मामलों में ही पारित किए जाते हैं और याचिकाकर्ता से कहा कि वह सभी सामग्री ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश करें। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।

उच्च न्यायालय ने एक अगस्त को बंगलूरू सिविल कोर्ट द्वारा जारी उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें दफनाने के मामले पर रिपोर्टिंग पर रोक लगाई गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि लगभग 8,000 यूट्यूब चैनल मंदिर के खिलाफ अपमानजनक सामग्री चला रहे हैं। धर्मस्थल मंदिर निकाय के सचिव हर्षेन्द्र कुमार डी ने कथित अपमानजनक सामग्री को हटाने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।
 

ईडी की याचिका पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने एयरसेल-मैक्सिस मामले में कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम के खिलाफ धन शोधन के आरोप तय करने पर बहस स्थगित करने के आदेश के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई के लिए शुक्रवार को सहमति जताई। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चिदंबरम को नोटिस जारी किया। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के कारण धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मुकदमे में देरी होगी। न्यायमूर्ति कांत ने राजू से कहा कि मान लीजिए कि कल किसी अपराध में कोई आरोप तय नहीं होता या ट्रायल कोर्ट आरोप तय कर देता है, लेकिन उच्च न्यायालय या यह अदालत उसे खारिज कर देती है, तो आपकी पूरी मेहनत और परिश्रम व्यर्थ चला जाएगा।

एअर इंडिया की सुरक्षा जांच के ऑडिट के लिए समिति गठित करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एअर इंडिया की सुरक्षा जांच और रखरखाव प्रक्रियाओं का स्वतंत्र रूप से ऑडिट करने के लिए एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति के गठन की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि वह एअर इंडिया को ही क्यों निशाना बना रहे हैं। यह याचिका हाल ही में अहमदाबाद-लंदन मार्ग पर एयर इंडिया बोइंग विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के मद्देनजर दायर की गई थी। नरेंद्र कुमार गोस्वामी और लक्ष्मण प्रसाद गोस्वामी द्वारा दायर जनहित याचिका में एयर इंडिया की सुरक्षा प्रथाओं, रखरखाव प्रक्रियाओं और परिचालन प्रोटोकॉल की सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी।
 

विदेशी कंपनी से जुड़ी आयकर अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया विभाजित फैसला
सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय कराधान से संबंधित सहायक आयकर आयुक्त की बंबई उच्च न्यायालय के 2023 के फैसले के खिलाफ अपील पर विभाजित फैसला सुनाया। इस मामले में शेल्फ ड्रिलिंग रॉन टैपमेयर लिमिटेड सहित विदेशी ड्रिलिंग कंपनियां शामिल थीं। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 144सी और 153 की कानूनी व्याख्या पर भिन्न-भिन्न राय दी। विवाद यह था कि क्या मसौदा मूल्यांकन आदेश जारी करने के लिए धारा 144सी के तहत प्रदान की गई समय अवधि को स्वतंत्र रूप से माना जाना चाहिए या मूल्यांकन पूरा करने के लिए धारा 153 के तहत निर्धारित समग्र सीमा अवधि के अंतर्गत समाहित किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने राजस्व विभाग की अपील को खारिज कर दिया और निष्कर्ष निकाला कि उच्च न्यायालय का यह कहना सही था कि इन मामलों में धारा 144सी के तहत शुरू की गई मूल्यांकन कार्यवाही समय-सीमा समाप्त हो चुकी थी, क्योंकि अंतिम आदेश 30 सितंबर, 2021 की विस्तारित समय सीमा के भीतर पारित नहीं किया जा सका। न्यायाधीशों द्वारा परस्पर विरोधी निर्णय दिए जाने के कारण, अब यह मामला प्रशासनिक पक्ष में भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा, ताकि मामले को एक बड़ी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए उचित निर्देश प्राप्त किए जा सकें।
 
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के जजों को लंबित फैसले लिखने के लिए छुट्टी पर जाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को लंबित फैसले लिखने के लिए अवकाश लेने का सुझाव दिया। न्यायालय ने कहा कि ऐसे दर्जनों मामले हैं जिनमें फैसला नहीं सुनाया गया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने न्यायाधीशों से कहा कि वे अपनी स्वीकृत छुट्टियां लें और लंबित कार्य पूरा करें। झारखंड उच्च न्यायालय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा से पीठ ने कहा कि 61 मामले लंबित हैं। झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से कहें कि वे 10-12 सप्ताह के लिए स्वीकृत अवकाश लें और निर्णय लिखें। आजकल न्यायाधीशों के पास पर्याप्त अवकाश उपलब्ध हैं। इन मामलों से छुटकारा पा लीजिए। लोगों को निर्णय चाहिए। उन्हें न्यायशास्त्र या किसी और चीज की चिंता नहीं है। राहत देने से इनकार किया जाए या उसे अनुमति दी जाए। इस पर न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि 61 मामले बड़ी संख्या है और उन्होंने उनसे कहा कि वे अदालत के सुझाव को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तक पहुंचाएं। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तत्काल कदम उठाएंगे। मामले को तीन महीने बाद आगे के विचार के लिए रखा जाएगा। उस समय तक आवश्यक कार्य कर लिए जाएं।
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