पीएमएलए मामले में सुप्रीम अदालत जांचेंगी समीक्षा याचिकाओं की योग्यता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह प्रवर्तन निदेशालय को धन शोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तारी, संपत्ति कुर्क करने, तलाश व जब्ती के अधिकारों को बरकरार रखने संबंधी अपने 2022 के फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिकाओं की पोषणीयता पर दलीलें सुनेगा।
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा, ईडी ने तीन प्रारंभिक मुद्दे प्रस्तावित किए हैं जो मुख्य रूप से समीक्षा याचिकाओं की पोषणीयता से जुड़े हैं। पीठ ने कहा, समीक्षा याचिकाकर्ताओं ने उसके विचार के लिए 13 प्रश्न प्रस्तावित किए हैं। पीठ ने कहा, चूंकि प्रस्तावित मुद्दे पुनर्विचार कार्यवाही में उठ रहे हैं, इसलिए हम सबसे पहले पुनर्विचार याचिकाओं की पोषणीयता के मुद्दे पर पक्षकारों की सुनवाई करने का प्रस्ताव रखते हैं। उसके बाद पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए जाने वाले प्रस्तावित प्रश्नों पर सुनवाई करेंगे। पीठ ने कहा, यदि पुनर्विचार याचिकाएं पोषणीय लगती हैं, तो अंतत: विचार के लिए उठने वाले प्रश्नों का निर्धारण भी न्यायालय की ओर से ही किया जाएगा।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, सबसे पहले यह मुद्दा उठाने का ही औचित्य है कि क्या पुनर्विचार याचिका विचार योग्य है। हम सभी जानते हैं कि पुनर्विचार की अपनी सीमाएं होती हैं... कभी-कभी हमारा दृष्टिकोण अलग हो सकता है, लेकिन फिर भी हम उसे प्रतिस्थापित नहीं कर सकते। इसके बाद पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 6 अगस्त की तारीख तय कर दी।