सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को कई बड़े मामलों पर सुनवाई होनी है। इनमें सीबीएससी की ओर से तीसरी भाषा को अनिवार्य बनाए जाने को चुनौती दिए जाने पर सुनवाई होगी। वहीं, इस मामले की आज होने वाली सुनवाई से पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। वहीं, दूसरे वकील ने आज ही मामले की सुनवाई करने का अनुरोध किया।
इसके इतर ट्रांसजेंडर संरक्षण अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं और केंद्र सरकार द्वारा उच्च न्यायालय से इन याचिकाओं को स्थानांतरित करने की याचिका भी आज पेश की गई है। वहीं, अदालत में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट जाली दस्तावेजों से संबंधित डिजिटल गिरफ्तारी के पीड़ितों के मामले की स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई करेगा। इसी के साथ 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।
कपूरथला महाराजा संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कपूरथला राजघराने की संपत्ति विवाद मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भी पूर्व शासक की निजी व्यक्तिगत संपत्तियां अब ज्येष्ठाधिकार के आधार पर नहीं बांटी जाएंगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी संपत्तियों का बंटवारा हिंदू या मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के अनुसार होगा।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस वी एन भट्टी की पीठ ने कहा कि ज्येष्ठाधिकार का नियम केवल राजगद्दी और पारंपरिक उपाधियों तक सीमित हो सकता है, लेकिन निजी संपत्तियों पर इसका अधिकार नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रियासतों के भारत में विलय के बाद पूर्व शासकों की स्थिति एक सामान्य भारतीय नागरिक जैसी हो गई थी। ऐसे में उनकी निजी संपत्तियां अब व्यक्तिगत कानूनों के तहत उत्तराधिकारियों में बांटी जाएंगी। अदालत ने कहा "राष्ट्रपति द्वारा महाराजा के रूप में मान्यता केवल औपचारिक और विशेषाधिकार संबंधी थी। इसका मतलब संपत्ति पर पूर्ण स्वामित्व नहीं माना जा सकता।"
यह मामला कपूरथला के मान्यता प्राप्त ‘महाराजा’ ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह, उनकी अलग रह रही पत्नी गीता देवी और बच्चों के बीच संपत्ति विवाद से जुड़ा है। ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह का दावा था कि परिवार के सबसे बड़े पुरुष उत्तराधिकारी होने के कारण पूरी संपत्ति पर केवल उनका अधिकार है और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम उनके मामले में लागू नहीं होता।
मणिपुर में बाहर के कैडर से DGP नियुक्त करने की मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार को बड़ा राहत देते हुए राज्य के बाहर के कैडर से पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि राज्य में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश सुनाया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि वर्तमान डीजीपी राजीव सिंह, जो त्रिपुरा कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं, 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए तत्काल निर्देश की आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि राज्य में मौजूद विशेष परिस्थितियों को देखते हुए मणिपुर कैडर के बाहर से डीजीपी नियुक्त करने की मांग उचित है। इसलिए राज्य सरकार को इसकी अनुमति दी जाती है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि पात्र अधिकारियों में से उपयुक्त क्षमता वाला अधिकारी तलाशने में दिक्कत आ रही है। वहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि मौजूदा डीजीपी का कार्यकाल जल्द समाप्त हो रहा है, इसलिए नए नियुक्ति आदेश की तत्काल जरूरत है।