सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में जारी अवैध रेत खनन पर राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले इस संरक्षित क्षेत्र में अवैध खनन से घड़ियाल समेत कई जलीय और संकटग्रस्त जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने राजस्थान के गृह, खनन, वित्त, वन, पर्यावरण और परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभागों के प्रमुख सचिवों को 19 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सभी अधिकारियों से हलफनामा दाखिल कर 2 अप्रैल के आदेश के अनुपालन की जानकारी मांगी है। सर्वोच्च अदालत ने सवाल उठाया कि अवैध खनन क्षेत्रों में बिना पंजीकरण वाले ट्रैक्टर और वाहन आखिर कैसे खुलेआम चल रहे हैं।
बंगाल में आई-पैक पर ईडी की छापेमारी मामले में 22 मई को अगली सुनवाई
पश्चिम बंगाल में आई-पैक (I-PAC) दफ्तर पर छापा मामले में सुप्रीम कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर 22 मई को सुनवाई करेगा। ईडी ने अपनी याचिका में पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य प्रशासन पर आई-पैक के दफ्तर पर छापे के दौरान जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया है। यह मामला जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। अदालत ने पहले इसे जुलाई में सूचीबद्ध करने की बात कही, लेकिन बाद में 22 मई की तारीख तय कर दी। ईडी ने 23 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि 8 जनवरी को कोलकाता स्थित आई-पैक कार्यालय में छापे के दौरान राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। एजेंसी का आरोप है कि ममता ने जांच को रोकने की कोशिश की।