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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में दीपम विवाद मामला, तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी

Tue, 23 Jun 2026 01:27 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स - फोटो : अमर उजाला
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तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें राज्य की तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीपक जलाने की इजाजत दी गई थी। सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने 11 जून को सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की। सरकारी वकील बी करुणाकरण ने इस याचिका की पुष्टि की है। यह पूरा विवाद पहाड़ी पर स्थित एक पुराने पत्थर के खंभे पर दीप जलाने को लेकर है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने छह जनवरी को अपने आदेश में कहा था कि कार्तिक दीपम त्योहार के दिन वहां दीप जलाया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वह जगह श्री सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में वक्फ बोर्ड का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
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राज्य सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस आदेश का विरोध किया है। सरकार का कहना है कि पहाड़ी पर दीप जलाने वाली जगह के पास ही एक दरगाह है। वहां दीप जलाने से सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। मंदिर प्रबंधन और दरगाह कमेटी ने भी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने सरकार की इन चिंताओं को काल्पनिक बताया था। कोर्ट ने कहा था कि सरकार अपनी सुविधा के लिए डर का माहौल बना रही है। कोर्ट के अनुसार, वक्फ बोर्ड का यह दावा भी गलत है कि वह खंभा दरगाह का हिस्सा है। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि सरकार को समुदायों के बीच की दूरी कम करने का प्रयास करना चाहिए था। यह मामला रामा रविकुमार और अन्य लोगों की याचिका के बाद शुरू हुआ था। उन्होंने हर साल नवंबर-दिसंबर में होने वाले त्योहार के दौरान वहां दीप जलाने की मांग की थी। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा।

राशन लिस्ट से नाम हटाने का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाई कोर्ट जाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया है। इस याचिका में दावा किया गया था कि पश्चिम बंगाल में जिन लोगों के नाम मतदाता सूची के विशेष संशोधन (SIR) से बाहर कर दिए गए हैं, उन्हें अब राशन लिस्ट से भी हटाया जा रहा है। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि मतदाता सूची से बाहर होने की वजह से बहुत से लोगों के राशन कार्ड रद्द होने का खतरा है। इससे गरीब लाभार्थियों को भारी परेशानी हो रही है। इस पर बेंच ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट पूरी तरह काम कर रहा है, इसलिए याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत लेकर वहीं जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि राशन कार्ड से जुड़ा मुद्दा एक अलग मामला है।

पश्चिम बंगाल के खाद्य और आपूर्ति विभाग ने चार जून को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में अपात्र लाभार्थियों की पहचान करने और उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से हटाने के लिए राज्यव्यापी जांच शुरू करने को कहा गया था। विभाग ने इस प्रक्रिया को मतदाता सूची के नतीजों से जोड़ दिया है। यह काम 15 जून तक पूरा होना था। जांच के दायरे में वे लोग हैं जिन्हें मतदाता सूची में अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृत या डुप्लीकेट पाया गया है। इसके अलावा, जिनके आवेदन रद्द कर दिए गए थे, उनके नाम भी राशन लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन लाभार्थियों ने ट्रिब्यूनल में अपील की है या नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत आवेदन दिया है, उनके राशन कार्ड अभी सक्रिय रहेंगे। उनकी अपील पर फैसला आने के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।

बंगाल में राशन और कल्याणकारी योजनाओं को SIR से जोड़ने के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के उन आदेशों को चुनौती दी गई है, जिनमें कथित तौर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्नपूर्णा योजना के लाभों को चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से जोड़ने का आरोप लगाया गया है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। उनका तर्क था कि इन आदेशों के कारण बड़ी संख्या में लोगों के कल्याणकारी लाभ प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि हाईकोर्ट ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद फिर से कामकाज शुरू कर चुका है, इसलिए वहीं याचिका दायर की जा सकती है।

याचिका में 4 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा जारी आदेश और 19 मई 2026 को महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की अधिसूचना को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन आदेशों के तहत एसआईआर प्रक्रिया में "मृत", "स्थानांतरित", "हटाए गए" या "अनुपस्थित" मतदाताओं की श्रेणियों के आधार पर राशन कार्ड और अन्य लाभार्थियों की पात्रता की जांच की जा रही है।
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मुआवजा सिर्फ गणितीय हिसाब नहीं पीड़ितों को राहत देने का प्रयास है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत ‘उचित मुआवजा’ देने का सिद्धांत किसी सटीक गणितीय गणना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लोगों को राहत देने का प्रयास है, जिन्होंने अपूरणीय क्षति झेली है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा व जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने दिल्ली में जून 2013 में सड़क हादसे में मारे गए 20 वर्षीय युवक के माता-पिता को दिए गए मुआवजे में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए यह टिप्पणी की। मृतक चार्टर्ड अकाउंटेंसी (फाइनल) की पढ़ाई कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के अगस्त 2022 के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर आया। हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें मृतक के माता-पिता को 81.21 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष कोर्ट ने मृतक के माता-पिता को संतान की मृत्यु से हुई क्षति के तहत 40-40 हजार रुपये अतिरिक्त देने का निर्देश दिया। इसके बाद कुल मुआवजा राशि 81,21,900 रुपये से बढ़कर 82,01,900 रुपये हो गई।

जुबीन गर्ग मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर असम सरकार से मांगा जवाब
लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी श्यामकानू महंता की ओर से दाखिल जमानत याचिका पर असम सरकार से जवाब मांगा है। महंता ने गुवाहाटी कोर्ट के 29 मई के जमानत याचिका रद्द करने के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ महंता की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जुलाई में तय करते हुए असम सरकार को नोटिस जारी किया। जुबीन की पिछले साल सिंगापुर में रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के चौथे संस्करण में हिस्सा लेने सिंगापुर गए थे। उनकी मौत को लेकर असम में 60 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थी। असम पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की एक विशेष टीम ने जुबीन की मौत की जांच कर रही है। हालांकि, सिंगापुर पुलिस ने इस मामले की अलग से जांच की थी, लेकिन उसे किसी तरह की गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला।

1993 बोबाजार ब्लास्ट के दोषी राशिद की समय से पहले रिहाई पर सुप्रीम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें 1993 कोलकाता बोबाजार ब्लास्ट के मुख्य आरोपी और टाडा दोषी मोहम्मद राशिद खान को समय से पहले रिहा करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने प.बंगाल सरकार की याचिका पर नोटिस जारी कर अंतरिम राहत देते हुए हाईकोर्ट के आदेश को स्थगित कर दिया। कोर्ट ने कहा, यदि आदेश पर रोक नहीं लगाई गई तो राज्य सरकार की अपील बेकार हो जाएगी। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने राज्य सरकार की ओर से दलील दी कि 70 से ज्यादा लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के घायल होने वाले इस भयानक ब्लास्ट में सुधारवादी सिद्धांत लागू करके रिहाई देना उचित नहीं है। वहीं राशिद खान की ओर से कैविएट दाखिल कर वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर शमशाद ने कहा कि उनका मुवक्किल 33 साल से ज्यादा समय से जेल में है। उसका आचरण वहां अच्छा है। उन्होंने एक सह-अभियुक्त पन्नालाल जायसवाल का हवाला दिया, जिन्हें 2014 में रिहा कर दिया गया था। हालांकि पीठ ने कहा, दोनों की भूमिका अलग-अलग थी। राशिद विस्फोट का मास्टरमाइंड था। शमशाद ने राशिद की खराब सेहत का भी हवाला दिया।
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