सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस(इस्कॉन) द्वारा संचालित स्कूलों में कथित यौन शोषण के मामलों की जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग(एनसीपीसीआर) और संबंधित राज्य बाल अधिकार आयोगों के समक्ष अपनी शिकायतें रखने का निर्देश दिया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगों को भी अपने प्रतिनिधित्व सौंपते हैं तो उन पर उचित समय के भीतर विचार किया जाना चाहिए। पीठ ने यह निर्देश उस जनहित याचिका पर दिया जिसमें राजनीश कपूर और अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि इस्कॉन द्वारा संचालित स्कूलों में सामने आए कथित यौन शोषण के मामलों की जांच कराई जाए। याचिका में दावा किया गया था कि आंतरिक रिकॉर्ड में गंभीर यौन उत्पीड़न के मामलों का उल्लेख मिलता है और इस संबंध में की गई शिकायतों पर संबंधित अथॉरिटी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ताओं ने यह आरोप भी लगाया था कि पीड़ित बच्चों की शिकायतें समय पर दर्ज नहीं की गईं और संस्थान के भीतर मौजूद कुछ रिकॉर्ड ऐसे मामलों की पुष्टि करते हैं, जिन पर तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस स्तर पर वह सीधे जांच का आदेश नहीं दे सकते। कोर्ट ने कहा कि वह याचिकाकर्ताओं को सक्षम वैधानिक संस्थाओं एनसीपीसीआर तथा संबंधित राज्य आयोगों का दरवाजा खटखटाने का अवसर प्रदान कर रहा है क्योंकि बच्चों के संरक्षण से जुड़े ऐसे मामलों पर प्राथमिक रूप से इन्हीं निकायों को कार्रवाई करनी होती है।
दो जजों की खंडपीठ ने तमिलनाडु के मामले में मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने एमडीएमके के संस्थापक वाइको की याचिका पर चुनाव आयोग (ईसी) से जवाब मांगा है। वैको ने तमिलनाडु में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लागू करने के चुनाव आयोग के निर्णय को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ में चीफ जस्टिस (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची शामिल हैं। अदालत ने इस मामले की सुनवाई दो दिसंबर को तय की है। याचिका में वाइको ने दावा किया है कि यह पुनरीक्षण प्रक्रिया समानता के अधिकार सहित कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम तथा मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के प्रावधानों के विपरीत है। उनका कहना है कि यह अधिसूचना पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। डीएमके, सीपीआई एम, टीवीके और अभिनेता विजय सहित कई राजनीतिक दल और नेता भी इस पुनरीक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुके हैं। 11 नवंबर को शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से इन सभी याचिकाओं पर अलग-अलग जवाब मांगे थे।
सेना से बर्खास्त ईसाई जवान की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने उस ईसाई भारतीय सेना के जवान की याचिका खारिज कर दी, जिसे धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा न लेने पर सेवा से हटा दिया गया था। जवान ने दलील दी कि वह मंदिर और गुरुद्वारे के गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकता था, क्योंकि यह उसकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है। लेकिन अदालत ने कहा कि सेना में अनुशासन सर्वोपरि है और एक कमांडर का ऐसा व्यवहार बाकी जवानों का अपमान करता है। कोर्ट ने माना कि जवान का आचरण घोर अनुशासनहीनता है और वह सेना जैसी संस्था के लिए 'पूरी तरह अनुपयुक्त' है। इस तरह दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जवान की बर्खास्तगी सही ठहराई।
संदेसरा बंधुओं के सामने 5,100 करोड़ चुकाने की शर्त, अदालत सभी मामले खत्म करने को तैयार
सुप्रीम कोर्ट ने स्टर्लिंग बायोटेक के मालिक और कारोबारी नितिन व चेटन सैंडेसरा के खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाही खत्म करने का रास्ता खोल दिया है- लेकिन एक शर्त पर। दोनों भाइयों को 5,100 करोड़ रुपये जमा कराने होंगे ताकि सरकारी बैंकों का बकाया पूरा निपट सके। अदालत ने कहा कि जब सार्वजनिक धन वापस मिल रहा है, तो मामलों को जारी रखना कोई मतलब नहीं रखता। यह रकम 17 दिसंबर 2025 तक कोर्ट में जमा करनी होगी। उसके बाद कोर्ट रजिस्ट्री बैंक-वार बकाया की जांच कर राशि बांट देगी। कोर्ट ने साफ किया कि यह फैसला सिर्फ इस मामले की खास परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है, और इसे भविष्य के मामलों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। सैंडेसरा बंधुओं पर CBI, ED, SFIO और आयकर विभाग ने कई गंभीर धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन के मामले दर्ज किए थे। लेकिन अब, तय राशि जमा होने पर, ये सभी मामले पूरी तरह खत्म हो जाएंगे।
महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में 50% रिजर्वेशन की सीमा बरकरार
महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में 50% रिजर्वेशन की सीमा को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बरकरार रखने पर, एडवोकेट देवदत्त पालोडकर ने कहा, 'महाराष्ट्र राज्य में निकाय चुनावों के बारे में एक जरूरी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट बेंच के सामने हुई... अब इस मामले पर शुक्रवार (12 दिसंबर) को दोपहर 12 बजे सुनवाई होगी... अब नियम यह है कि एससी+एसटी+ओबीसी का कुल रिजर्वेशन 50% से ज्यादा नहीं होगा... महाराष्ट्र में, ज्यादातर पांच आदिवासी जिलों और कुछ दूसरे जिलों में, रिजर्वेशन ज्यादा है, और यह 50% से ज्यादा है... सुप्रीम कोर्ट ने सभी पार्टियों को एक छोटा नोट जमा करने का भी निर्देश दिया है... अब कुल मिलाकर नतीजा यह है कि लोकल बॉडीज, जो नगरपालिका परिषद और नगर पंचायत हैं, के चुनाव जारी रहेंगे... जिला परिषद, पंचायत कमेटियों और नगर निगम के बारे में, शुक्रवार तक इसकी घोषणा नहीं की जाएगी। किसी भी चुनाव पर कोई रोक नहीं है, लेकिन राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार ने मौखिक रूप से कहा है कि वे जिला परिषद, पंचायत कमेटियों और बीएमसी समेत नगर निगम के चुनावों की घोषणा नहीं करेंगे...'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सभी नफरती भाषणों की निगरानी अदालत का काम नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि वह देशभर में होने वाली हर नफरत भरे भाषण की न तो निगरानी करने का इरादा रखता है और न ही वह कानून बनाने के लिए बैठा है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि इसके लिए कानूनी प्रावधान, पुलिस तंत्र और हाईकोर्ट जैसी संस्थाएं मौजूद हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी जिसमें एक विशेष समुदाय के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार की कथित अपीलों का मुद्दा उठाया गया था। पीठ ने कहा कि हम इस याचिका के बहाने कानून नहीं बनाएंगे। न ही देश के किसी कोने में होने वाली हर छोटी घटना पर निगरानी रखने के लिए इच्छुक हैं। हाईकोर्ट हैं, पुलिस तंत्र है, संसद द्वारा बनाए कानून हैं, ये सभी पहले से मौजूद हैं। सुनवाई की शुरुआत में शीर्ष अदालत ने आवेदक को यह सलाह दी कि वह अपनी शिकायत लेकर संबंधित हाईकोर्ट जाए।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: केरल के उन इलाकों में प्राइमरी स्कूल खोलें जहां नहीं हैं
सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को उन सभी इलाकों में जहां कोई भी स्कूल नहीं चल रहा, सरकारी लोअर और अपर प्राइमरी स्कूल खोलने को कहा। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि हर बच्चे को मुफ्त और जरूरी शिक्षा के अधिकार कानून के तहत पड़ोस में स्कूल की सुविधा मिलनी चाहिए। पीठ ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें राज्य सरकार को ऐसे इलाके में स्कूल खोलने के लिए कहा गया था, जिसके 3-4 किलोमीटर के दायरे में कोई पढ़ाई की सुविधा नहीं है। पीठ ने कहा, केरल सरकार को 2009 के कानून के तहत उन सभी इलाकों में सरकारी प्राइमरी स्कूल खोलने के लिए एक पूरा फैसला लेना चाहिए, जहां कोई भी स्कूल नहीं चल रहा है। साथ ही, मुश्किल भौगोलिक इलाके वाले ऐसे सभी इलाकों में बिना देर किए स्कूल खोले जाने चाहिए। पहले चरण में, सरकार को उन सभी इलाकों की पहचान करनी होगी जहां कोई लोअर या अपर प्राइमरी स्कूल नहीं है। दूसरे चरण में उन सभी इलाकों में स्कूल खोले जाने चाहिए जहां एक किलोमीटर के दायरे में कोई लोअर प्राइमरी स्कूल या 3-4 किलोमीटर के दायरे में कोई अपर प्राइमरी स्कूल नहीं है। सीजेआई ने कहा, हमें पता है कि राज्य सरकार के पास जरूरी स्कूलों को ठीक से बनाने के लिए फंड नहीं हो सकता है। इस बारे में, कुछ निजी इमारतों की पहचान की जाए जहां कामचलाऊ इंतजाम के तौर पर स्कूल बनाए जा सकें। लेकिन ऐसे इंतजाम हमेशा नहीं चल सकते, और इसके लिए जरूरी बजट का इंतजाम किया जाना चाहिए। पीठ केरल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील एक पिटीशन पर थी जिसमें मंजेरी म्युनिसिपैलिटी के एलंबरा में एक स्कूल खोलने की मांग की गई थी, जहां 3-4 किलोमीटर के दायरे में कोई प्राइमरी विद्यालय नहीं था।