भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट के जज ने सुनवाई से खुद को किया अलग
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शील नागू ने पंजाब सरकार की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है, जिसमें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
जस्टिस दत्ता ने कहा कि मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के पास भेजा जाना चाहिए, ताकि इसे किसी दूसरी पीठ को सौंपा जा सके। उन्होंने कहा कि मौजूदा पीठ में सुनवाई होने पर आपत्तियां उठ सकती हैं। जस्टिस दत्ता ने कहा, 'हम बहुत कठिन समय में हैं। कोई नहीं जानता कि हमला कहां से होगा।” उन्होंने कहा कि 17 अन्य पीठ हैं और मामले को सीजेआई के पास भेजने के लिए आदेश पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
इससे पहले, पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पीठ को बताया था कि जस्टिस शील नागू ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते हुए इससे जुड़े मामलों में कुछ आदेश पारित किए थे, हालांकि वे एक अलग मुद्दे पर थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह यह तय करने से पहले उन आदेशों की जांच करेगा कि मौजूदा पीठ इस मामले की सुनवाई कर सकती है या नहीं।