सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में 46 आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़े अवमानना मामलों को सूची से हटाए जाने पर मंगलवार को अपनी रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण मांगा। जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने मामले को बुधवार दोपहर दो बजे संबंधित याचिकाओं के साथ फिर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। पीठ ने रजिस्ट्री को यह बताने को कहा कि न्यायिक आदेश के तहत मंगलवार दोपहर दो बजे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए गए मामले को लंच के दौरान सूची से क्यों हटा दिया गया। वरिष्ठ वकील गुरु कृष्णकुमार ने पीठ को बताया कि मामला सूची में 32वें नंबर पर था, लेकिन दोपहर करीब 12 बजे हटा दिया गया और पक्षकारों को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई। अदालत ने रजिस्ट्री को इस संबंध में नोट दाखिल करने का निर्देश दिया। अवमानना कार्यवाही केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ शुरू की गई है। यह 23 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन न होने से जुड़ा है। उस फैसले में सीएपीएफ कैडर में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड तक प्रतिनियुक्ति वाले पदों को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया गया था।