पुणे पोर्श कार दुर्घटना: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने मई, 2024 में पुणे में हुई पोर्श कार दुर्घटना में दो लोगों की जान जाने के मामले में एक आरोपी की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और बॉम्बे हाई कोर्ट के 16 दिसंबर के आदेश के खिलाफ आरोपी अमर संतिश गायकवाड़ की ओर से दायर याचिका को इस मामले से संबंधित अन्य समान मामलों के साथ जोड़ दिया।
पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 19 मई, 2024 को, शराब के नशे में धुत 17 वर्षीय नाबालिग द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही पोर्श कार ने दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। वकील सना रईस खान के जरिये पेश केस में गायकवाड़ ने कहा कि हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इन्कार करने संबंधी अपने फैसले में गलती की है। खान ने बृहस्पतिवार को पीठ के सामने कहा, याचिकाकर्ता के खिलाफ एकमात्र आरोप यह है कि उसने पैसे के लेनदेन में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उसपर आरोप है कि मेडिकल सबूतों से छेड़छाड़ करने या ससून अस्पताल में किशोर के रक्त के नमूने की अदला-बदली के लिए पैसे का लेन-देन किया। पुलिस के आरोप के अनुसार उसने ड्राइवर से पैसे लिए और उसे डॉक्टर के सहायक को सौंप दिया।
याचिका में कहा गया है, अभियोजन पक्ष ने गायकवाड़ पर आरोप लगाया है कि उसने कार चलाने वाले नाबालिग की मां के कहने पर सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए। हालांकि उस महिला को जमानत मिल चुकी है और ऐसे में न्यायिक समानता का सिद्धांत कहता है कि गायकवाड़ को भी जमानत मिलनी चाहिए क्योंकि उसका अपराध में उसकी भूमिका महिला से कहीं हल्की है।