नई ओबीसी सूची मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर अदालत ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई नई अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची को स्थगित कर दिया गया था। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान सुनाया।
मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन देते हुए कहा कि इस मामले की आगे सुनवाई अगले सोमवार को की जाएगी। अब यह मामला अगले सोमवार को फिर से सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा, जिसमें यह तय होगा कि हाईकोर्ट का आदेश उचित था या नहीं।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में नई ओबीसी सूची तैयार की थी, जिसमें कुछ नई जातियों को शामिल किया गया था और कुछ पुरानी श्रेणियों को संशोधित किया गया था। लेकिन इस सूची को लेकर राज्यपाल की मंजूरी और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसे रोक दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सूची बनाते वक्त तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और यह संविधान के खिलाफ है। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
महाराष्ट्र: सुप्रीम कोर्ट ने अधिग्रहित की गई किसानों की जमीन का मुआवजा बढ़ाया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र के उन किसानों को दी जाने वाली मुआवजे की राशि बढ़ा दी, जिनकी भूमि 1994 में राज्य में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने के लिए अधिग्रहीत की गई थी। प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ मुंबई हाईकोर्ट के अप्रैल 2022 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसने किसानों की ओर से दायर अपील खारिज कर दी थी।
पीठ ने कहा, हम निर्देश देते हैं कि अपीलकर्ताओं को दिया जाने वाला मुआवजा 32,000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 58,320 रुपये प्रति एकड़ किया जाए। अदालत ने कहा कि किसानों की भूमि प्रमुख स्थान पर स्थित है और वे उच्चतम बिक्री दर का लाभ पाने के हकदार हैं।
पीठ ने कहा कि वह इस मामले को नए सिरे से विचार के लिए उच्च न्यायालय को भेज सकती थी, लेकिन अपीलकर्ता किसान थे और उनकी जमीन 1990 के दशक के आरंभ में प्रतिवादी-राज्य द्वारा अधिग्रहीत की गई थी, और उसके लिए यह निर्णय लेना उचित था कि क्या उन्हें उच्चतम आदर्श बिक्री विलेख के आधार पर मुआवजा दिया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कानून की स्थापित स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि जब समान भूमि के संदर्भ में कई मूल्य हों, तो आमतौर पर सबसे उच्चतम मूल्य, जो एक वास्तविक लेनदेन है, पर विचार किया जाएगा। अपील करने वाले किसान महाराष्ट्र के परभणी जिले के पुंगाला गांव के निवासी बताए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के यूट्यूबर की याचिका पर जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूट्यूबर सावुक्कु शंकर की उस याचिका पर नोटिस जारी किया। जिसमें उन्होंने तमिलनाडु की 'अन्नाल आंबेडकर बिजनेस चैंपियंस स्कीम' (एएबीसीएस) में कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई जांच का आदेश देने से इनकार करने वाले मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ को शंकर के वकील ने यह भी बताया कि सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका दायर करने के बाद उनके घर में तोड़फोड़ की गई। शंकर ने राज्य की एएबीसीएस और नमस्ते योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर धन की हेराफेरी का आरोप लगाया। इन योजनाओं का मूल उद्देश्य अनुसूचित जाति के उद्यमियों और सफाई कर्मचारियों को लाभ पहुंचाना था।
याचिका में दावा किया गया कि इन योजनाओं को निजी संस्थाओं की सहायता से, अवैध सरकारी आउटसोर्सिंग और राजनीतिक हस्तक्षेप के माध्यम से अयोग्य लाभार्थियों द्वारा हथिया लिया गया है।उनके वकील ने कहा, चूंकि मैंने ये मुद्दे उठाए थे, इसलिये मेरे घर में तोड़फोड़ की गई। मैंने सीबीआई से निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन इससे इनकार कर दिया गया इसलिए मैंने उसे भी चुनौती दी है।
मद्रास हाईकोर्ट ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि इस तरह के कदम से राज्य पुलिस की ओर से किए गए कामों पर असर पड़ सकता है। इसके बजाय अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जांच पूरी करके 12 सप्ताह के भीतर अंतिम रिपोर्ट दाखिल करें।