सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में सरकारी जलाशय की जमीन पर जारी ‘रैयतवारी पट्टे’ को रद्द करने का फैसला बरकरार रखा है। हालांकि, न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने 20 फ्लैट मालिकों को राहत देते हुए राज्य सरकार को वैकल्पिक जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि फ्लैट मालिकों ने सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर जमीन को वैध समझा था। इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना मकानों को गिराने से परिवारों को गंभीर आर्थिक नुकसान हो सकता है।
छह महीने में वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश
मामला तिरुमुल्लैवोयल गांव की 0.72 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसे 1911 के राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जलाशय दर्ज किया गया था। जनवरी 2011 में पी. रामदास को इस जमीन का पट्टा दिया गया, जिस पर बाद में 20 फ्लैट बनाए गए। तमिलनाडु मर्केंटाइल बैंक ने भी जमीन के बदले 3.40 करोड़ रुपये का ऋण दिया था। भूमि प्रशासन आयुक्त ने 2019 में पट्टा रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और जिला कलेक्टर को छह महीने में वैकल्पिक जमीन देने के बाद निर्माण हटाने का निर्देश दिया।