ऑनर किलिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 फरवरी) को एक बार फिर सख्त कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों द्वारा कानून अपने हाथ में लेने की वजह से खरी खोटी सुनाई है। कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि वह जोड़े को इन खाप कार्रवाईयों से बचाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने मामले की सुनवाई के दौरान साफ-साफ कहा कि अगर कोई दो वयस्क शादी करते हैं, तो कोई भी तीसरा व्यक्ति दखल नहीं दे सकता, चाहे वह परिवार वाला हो या समाज या फिर और कोई। खाप मामले में अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह एक उच्चस्तरीय समिति बनाने पर विचार कर रहा है जिसके तहत अंतरजातीय और अंतरधर्म में शादी करने वाले जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही यह समिति जोड़े को खाप पंचायतों, अभिभावकों और रिश्तेदारों की सभी तरह की हिंसा से सुरक्षित रखने का काम करेगा।
इससे पहले भी कोर्ट ने खाप पंचायतों के खिलाफ अपना कड़ा रुख दिखाते हुए कहा था- खाप पंचायत या किसी को भी हक नहीं है कि वो बालिग जोड़े को लव मैरिज करने से रोके और न ही उस शादी पर सवाल उठा सके। इसके अलावा कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि अगर वे खाप पंचायतों को बैन नहीं करती है तो कोर्ट को कदम उठाने पड़ेंगे। सुप्रीम कोर्ट शक्तिवाहिनी संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रहा है इस याचिका में ऑनर किलिंग जैसे मामलों पर रोक लगाने की मांग को लेकर गाइडलाइन तैयार करने की मांग की गई है।