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Supreme Court: समलैंगिक जोड़े की याचिका पर SC ने केरल हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक, जारी किया नोटिस

Mon, 06 Feb 2023 05:36 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाईकोर्ट ने समलैंगिक जोड़े को मनोचिकित्सक के साथ परामर्श सत्र में भाग लेने का आदेश दिया था, जिसके बाद समलैंगिक जोड़े ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को समलैंगिक जोड़े को लेकर एक महिला की याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। महिला ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को शीर्ष कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उसे और उसकी साथी को मनोचिकित्सक के साथ परामर्श सत्र में भाग लेने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख तक केरल हाईकोर्ट के आदेश में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। 

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विक्टोरिया गौर की न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति पर भी कोर्ट करेगा सुनवाई 
सुप्रीम कोर्ट वकील एल विक्टोरिया गौरी की मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन की याचिका पर सुनवाई को मंजूरी दे दी। कोर्ट मामले में सात फरवरी को सुनवाई करेगी।

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ के समक्ष केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला वकील को पदोन्नत करने का प्रस्ताव कथित तौर पर तब विवादास्पद हो गया, जब उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से कथित संबद्धता के बारे में खबरें सामने आईं। न्यायाधीश पद के लिए प्रस्तावित वकील के मुस्लिम और ईसाइयों के बारे में कुछ बयान सामने आए हैं।
 

धर्मांतरण: राज्य कानूनों से संबंधित याचिकाओं पर 17 मार्च को सुनवाई
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह जबरन धर्मांतरण के दो अलग-अलग मुद्दों और अंतर्धार्मिक विवाहों के कारण होने वाले धर्मांतरण पर राज्य के विभिन्न कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 17 मार्च को सुनवाई करेगा।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ से वकील अश्विनी उपाध्याय ने आग्रह किया था कि जबरन धर्मांतरण के खिलाफ उनकी याचिका उन याचिकाओं के बैच से अलग थी, जो धार्म परिवर्तन पर विभिन्न राज्य कानूनों की वैधता को चुनौती दे रही हैं। उन्होंने बेंच से कहा कि मैं न तो राज्य के कानूनों का समर्थन कर रहा हूं और न ही उनका विरोध कर रहा हूं। मेरी याचिका जबरन धर्मांतरण के अलग-अलग मुद्दे से संबंधित है। उपाध्याय ने अपनी जनहित याचिका पर अलग से सुनवाई की मांग की।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की पुनर्विचार याचिका
सिक्किमी नेपाली समुदाय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी करते हुए से अप्रवासी बताया था। इसके बाद से राज्य में समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर एक समीक्षा याचिका दायर की है। 

कल राणा अयूब की याचिका पर फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट कल पत्रकार राणा अयूब की याचिका पर फैसला सुनाएगा। उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन का मामला दर्ज किया है। इसको लेकर गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें समन जारी किया था। अयूब ने इस समन को शीर्ष कोर्ट में चुनौती दी है। 

मद्रास हाईकोर्ट की अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगी लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी
लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी कल मद्रास हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगी। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली दो रिट याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिसमें उनके खिलाफ अभद्र भाषा के आरोपों का उल्लेख किया गया है।

'रिहाई के पात्र दोषियों के बारे में जानकारी एकत्र करें अधिकारी'
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के कानूनी सेवा प्राधिकरणों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे समय से पहले रिहाई के पात्र दोषियों के बारे में जिला और राज्य जेलों से जानकारी एकत्र करें और राज्य सरकार को इस संबंध में उसके प्रावधानों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा। इसने कहा सभी मामलों को कैदी के राहत के लिए पात्र बनने के तीन महीने के भीतर निपटाया जाएगा। शीर्ष कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्य सरकारों को भी वहां दोषियों की समय पूर्व रिहाई की निगरानी के लिए नोटिस जारी किए।

सीजेआई  डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने उत्तर प्रदेश के जेल अधीक्षकों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के सचिवों को सूचना देने का भी निर्देश दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समय पूर्व रिहाई की प्रक्रिया को 'एक कुशल और पारदर्शी मामले में लागू किया जा सके।

लक्षद्वीप सांसद की दोषसिद्धि, सजा को निलंबित करने के व्यापक प्रभाव होंगे: केंद्र शासित प्रदेश ने कहा
केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के प्रशासन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हत्या के प्रयास के मामले में सांसद मोहम्मद फैजल की दोषसिद्धि एवं सजा को केरल उच्च न्यायालय द्वारा निलंबित करने के व्यापक प्रभाव होंगे। केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस के एम जोसेफ और जस्टिस बी वी नागरत्ना की पीठ को बताया कि हाईकोर्ट ने फैजल की दोषसिद्धि और सजा को निलंबित करके गलती की है।

मेहता ने कहा,  "दोषसिद्धि और सजा का निलंबन एक अपवाद है और नियम नहीं है। इस कोर्ट के कई निर्णय हैं, जिसमें कहा गया है कि जघन्य अपराध में दोषी ठहराए जाने के बाद एक जनप्रतिनिधि अयोग्य हो जाता है। हाईकोर्ट के इस आदेश पर यदि रोक नहीं लगाई जाती है, तो इसके व्यापक प्रभाव होंगे।' उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि को इस आधार पर निलंबित कर दिया है कि अगर फैजल की अयोग्यता के बाद चुनाव होते हैं, तो इसका असर सरकारी खजाने और शुरू किए गए विकास कार्यों पर पड़ेगा।

नागरिकों को अपराध से बचाना राज्य का कर्तव्य : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अभद्र भाषा को लेकर आम सहमति बढ़ रही है। इस दौरान पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म के आधार पर नफरती भाषणों के कारण होने वाले अपराधों के लिए कोई जगह नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि अपने नागरिकों को ऐसे किसी भी घृणित अपराध से बचाना राज्य का प्राथमिक कर्तव्य है।

जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा, "जब घृणा अपराधों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है तो एक ऐसा माहौल बन जाता है जो बहुत खतरनाक है और इसे हमारे जीवन से जड़ से खत्म करना होगा। घृणास्पद भाषण पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। शीर्ष कोर्ट ने यह टिप्पणी एक मुस्लिम व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
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केरल हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें एक महिला को ‘लिंग संवेदीकरण परामर्श’ के लिए जाने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह निर्देश महिला की समलैंगिक साथी के इस आरोप पर दिया था कि उसकी साथी को उसके साथ संबंध रखने को लेकर उसके माता-पिता ने अवैध रूप से घर पर बंद कर रखा है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने महिला की साथी की याचिका पर प्रदेश सरकार और अभिभावकों को नोटिस जारी किया है। पीठ ने मामले की तथ्यात्मक स्थिति का पता लगाने के लिए रिपोर्ट मांगी है। पीठ महिला की साथी साथी की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि महिला को उसके माता-पिता ने उसके निवास पर अवैध रूप से हिरासत में रखा है। 

पीठ ने कहा कि हम चौथे और पांचवें उत्तरदाताओं (महिला के माता-पिता) को निर्देश देते हैं कि वे हिरासत में ली गई महिला को कोल्लम की पारिवारिक अदालत के समक्ष पेश करें। वे सुप्रीम कोर्ट ई-समिति की सलीना के साथ हिरासत में लिए गए महिला के साक्षात्कार की व्यवस्था करेंगे। इस कोर्ट के अधिकारी इस बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे कि उसे अवैध हिरासत में रखा जा रहा है या नहीं। बयान बिना किसी सुधार के निष्पक्ष तरीके से दर्ज किए जाएंगे। रिपोर्ट सीलबंद जमा की जाए। मामले को सूचीबद्ध करने अगली तारीख तक हाईकोर्ट के समक्ष आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी। पीठ में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला भी शामिल हैं। पीठ ने प्रदेश सरकार और अन्य को 17 फरवरी तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
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