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सुप्रीम कोर्ट: सीएए विरोधी आंदोलन को लेकर यूपी में जारी नोटिस पर जताई आपत्ति, कहा- आप ही शिकायतकर्ता, आप ही निर्णय लेने वाले, यह क्या है?

Fri, 11 Feb 2022 09:16 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोर्ट परवेज आरिफ टीटू की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उक्त आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की वसूली के लिए जिला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजे गए नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति नष्ट करने के कुछ आरोपियों को प्रदेश सरकार के नोटिसों पर शुक्रवार को आपत्ति जताई। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार से कहा, आप ही शिकायतकर्ता हैं और आप ही निर्णय लेने वाले, यह क्या है?

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि नोटिस और उसके अनुसार की गई कार्रवाई शीर्ष अदालत के वर्ष 2009 के एक फैसले में जारी निर्देशों के अनुरूप नहीं थी। नोटिसों पर निर्णय कार्यकारी अधिकारियों ने लिए थे न कि न्यायिक अधिकारियों ने। पीठ ने कहा, आप शिकायतकर्ता बन गए हैं, आप निर्णायक बन गए हैं और फिर आप आरोपी की संपत्ति कुर्क कर रहे हैं। 

पीठ परवेज आरिफ टीटू की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उक्त आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की वसूली के लिए जिला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजे गए नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है।
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यूपी की एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने पीठ को बताया, राज्य द्वारा 2021 में उत्तर प्रदेश सार्वजनिक और निजी संपत्ति के नुकसान की वसूली अधिनियम 2021 बनाया गया है, जो पहले के नोटिसों को सही ठहराता है। लेकिन पीठ प्रभावित नहीं हुई और जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, तब हम इन नोटिसों को रद्द कर देंगे। आप नए अधिनियम के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं। 

वहीं, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, आपके पहले के 256 वसूली आदेश यूपी जैसे बड़े राज्य में कोई बड़ी बात नहीं है। आप नए अधिनियम के तहत नई कार्यवाही शुरू करने की स्वतंत्रता के साथ इन आदेशों को वापस ले सकते हैं। उन्होंने कहा, एक झटके में आप नए अधिनियम से पहले जारी सभी नोटिसों को वापस ले सकते हैं। 

हाईकोर्ट के एक फैसले के आधार से भी सुप्रीम कोर्ट प्रभावित नहीं 
इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले में नोटिस का आधार होने का तर्क भी सुप्रीम कोर्ट को प्रभावित नहीं कर सका। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, अगर हमारे (सुप्रीम कोर्ट) आदेश का उल्लंघन होता है तो हम हाईकोर्ट के आदेशों पर कार्यवाही करेंगे। हाईकोर्ट के आदेश हमारे निर्देशों का स्थान नहीं ले सकते। 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, आप सुप्रीम कोर्ट को कैसे दरकिनार कर सकते हैं। कानून से पहले आपको यह दिखाना होगा कि अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने इन नोटिसों की निगरानी कैसे की। आपको यह दिखाना होगा कि अधिनियम से पहले जारी किए गए नोटिस सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन नहीं थे। प्रसाद ने पीठ को आश्वस्त किया कि अदालत ने जो कहा है, उस पर विचार किया जाएगा। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई अगले शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी।

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