सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह वकीलों की एक याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के एक हालिया परिपत्र को चुनौती दी गई है। बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में कोविड-19 महामारी का प्रसार घटने के मद्देनजर दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपनी कुछ अदालतों में प्रत्यक्ष सुनवाई की अनुमति दे दी है। वहीं, निचली अदालतों में एक दिन छोड़कर इसकी इजाजत दी गई है।
प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव व विनीत सरन की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करना होगा। पीठ ने कहा, 'हम समस्या की गंभीरता देख रहे हैं लेकिन हम चाहेंगे कि आप सबसे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय जाइए। अगर वहां राहत नहीं मिलती है तो यहां आइए। आम तौर पर हम हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक कामकाज में दखल नहीं देते हैं।'
याचिकाकर्ता वकीलों कार्तिक नायर और अन्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने कहा, 'हमें जीवन के अधिकार और न्याय प्रदान करने के बीच संतुलन बनाना होगा। अगर कोई विकल्प नहीं है तो वकीलों को अदालत आना होगा।' पीठ ने कहा, 'हम आपसे पूरी तरह सहमत हैं।' पीठ ने कहा कि वह मुद्दे पर बुधवार को सुनवाई जारी रखेगी और देखेगी कि इस पर क्या हो सकता है।
सिब्बल ने कहा कि वे सबसे पहले उच्च न्यायालय का रुख करेंगे लेकिन जब तक उच्च न्यायालय मामले पर सुनवाई करता है प्रत्यक्ष सुनवाई को वैकल्पिक बनाना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट और निचली अदालतों में वकालत करने वाले नायर, नैन्सी रॉय, सचित जॉली और अमित भगत द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि वे महामारी के कारण दैनिक सुनवाई में अदालतों में डिजिटल तरीके से कार्यवाही में हिस्सा लेते हैं।
याचिका में कहा गया कि वकीलों के स्वास्थ्य, जीवन और भलाई के लिए चिंताओं पर विचार किए बिना अदालतों के सामने याचिकाकर्ताओं और अन्य वकीलों, वादियों तथा न्यायिक-गैर न्यायिक व्यक्तियों को उपस्थित होने का आदेश देकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने एकतरफा फैसला किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 14 जनवरी को कहा था कि उसने 18 जनवरी से प्रत्यक्ष सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है। उच्च न्यायालय ने सोमवार से सप्ताह में एक दिन छोड़कर प्रत्यक्ष सुनवाई करने के लिए जिला अदालतों को भी निर्देश जारी किया था।