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Supreme Court: परिवार न्यायालय अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, दिल्ली HC की आलोचनाओं पर सुनवाई तय

Wed, 11 Feb 2026 04:53 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा परिवार न्यायालय अधिकारी पर लगाई गई आलोचनाओं के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दी। अदालत ने नोटिस जारी कर चार हफ्ते बाद मामले की सुनवाई तय की।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पारिवारिक मामलों में कार्यरत एक न्यायिक अधिकारी पर लगाई गई कड़ी टिप्पणियों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने की अनुमति दे दी। हाईकोर्ट ने नवंबर 2025 में पारित अपने फैसले में उस अधिकारी के वैवाहिक मामलों में निर्णय लेने के तरीके की कड़ी आलोचना की थी और उन्हें निर्देश दिया था कि वे दिल्ली ज्यूडिशियल अकादमी के तहत वैवाहिक कानूनों में उचित और व्यापक रिफ्रेशर-प्रशिक्षण पूरी कर लें, इससे पहले कि वे और कोई वैवाहिक मामला सुनें।

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सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे, ने बुधवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा उन्होंने यह कड़ी टिप्पणियां क्यों आमंत्रित की? बेंच ने यह भी उल्लेख किया कि न्यायिक अधिकारी जिला न्यायाधीश के रूप में अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग कर रहे हैं। अनुच्छेद 142 संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी मामले में “पूर्ण न्याय के लिए आवश्यक आदेश या निर्णय” पारित कर सके।

सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया और चार हफ्ते बाद सुनवाई तय की। बेंच ने फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश को स्थगित नहीं किया। अदालत ने कहा अगर हमें यथोचित लगेगा, तो हम टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा सकते हैं। फिलहाल हम नोटिस जारी कर रहे हैं।
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याचिकाकर्ता का तर्क
अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि पहले भी यह मान्यता रही है कि किसी अधिकारी के खिलाफ बिना उसे सुने व्यक्तिगत टिप्पणियां नहीं दी जानी चाहिए। इसके बावजूद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणियां की। बेंच ने याचिका पर नोटिस जारी किया और अगले चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए इसे सूचीबद्ध किया। अधिवक्ता ने हाई कोर्ट के आदेश को रुकवाने का अनुरोध किया, लेकिन बेंच ने कहा 'हम नोटिस जारी कर रहे हैं। इससे अधिक आप क्या चाहते हैं? अगर हमें यथोचित लगेगा, तो हम टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा देंगे।'

हाईकोर्ट की आलोचनाओं
हाईकोर्ट ने पारिवारिक मामले में दिए गए न्यायिक अधिकारी के फैसले को चुनौती देने वाली अपील में कहा था कि अधिकारी ने अलग-अलग कानूनों के प्रावधानों को मिलाकर निर्णय लिया, जिससे वैधानिक ढांचा विकृत हुआ। हाईकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि अधिकारी ने स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 की धारा 28A का हवाला दिया, जो कानून में मौजूद नहीं है और इस आधार पर तलाक का आदेश पारित किया।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा ऐसी टिप्पणियां व्यक्तिगत रूप से न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ नहीं होनी चाहिए, लेकिन अधिकारी की बार-बार की गई कार्यवाही न्यायिक विवेक को परेशान करती है और न्याय प्रशासन की अखंडता के लिए खतरा है।
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