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सुप्रीम कोर्ट: ओबीसी क्रीमी लेयर पर फिर होगी सुनवाई, 1 सितंबर को तय होगा अभ्यर्थियों का भविष्य; क्या है मामला?

Wed, 26 Aug 2026 06:33 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीएसई-2025 के 958 सफल अभ्यर्थियों की सेवा आवंटन प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में 1 सितंबर को अहम सुनवाई होगी। केंद्र चाहता है कि इन अभ्यर्थियों का ओबीसी क्रीमी लेयर निर्धारण 11 मार्च के फैसले से पहले लागू व्यवस्था के आधार पर किया जाए। परीक्षा के दौरान लागू नियमों पर भरोसा करने वाले अभ्यर्थियों के साथ नई कानूनी स्थिति आने के बाद कैसे न्याय होगा और क्या सेवा आवंटन प्रभावित होगा। आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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958 सफल अभ्यर्थियों का सेवा आवंटन क्यों अटका? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के 958 सफल अभ्यर्थियों की सेवा आवंटन प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने वाली है। केंद्र की उस याचिका पर एक सितंबर को विशेष पीठ सुनवाई करेगी, जिसमें 11 मार्च के फैसले को सीएसई-2025 के अभ्यर्थियों पर लागू करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस फैसले ने अन्य पिछड़ा वर्ग की क्रीमी लेयर तय करने के तरीके को प्रभावित किया था। अब सवाल है कि पुराने नियमों के आधार पर हुई परीक्षा के परिणाम और नई कानूनी स्थिति के बीच संतुलन कैसे बनेगा।

1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की विशेष पीठ एक सितंबर को दोपहर 3:30 बजे केंद्र की याचिका पर सुनवाई करेगी। यही पीठ 11 मार्च को ओबीसी क्रीमी लेयर से जुड़े मामले में फैसला सुना चुकी है। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने विशेष पीठ गठित करने पर सहमति जताई थी।

केंद्र आखिर किस बात पर स्पष्टीकरण चाहता है?

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग चाहता है कि सीएसई-2025 के लिए यूपीएससी की ओर से अनुशंसित 958 अभ्यर्थियों का सेवा आवंटन उस क्रीमी लेयर व्यवस्था के आधार पर पूरा करने की अनुमति दी जाए, जो 11 मार्च के फैसले से पहले लागू थी। केंद्र का कहना है कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया 11 मार्च के फैसले से पहले पूरी हो चुकी थी और अभ्यर्थियों ने उस समय लागू नियमों के आधार पर अपने फैसले लिए थे।

11 मार्च के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

‘यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 14 अक्टूबर 2004 का स्पष्टीकरण पत्र 8 सितंबर 1993 के कार्यालय ज्ञापन को खत्म नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता की केवल आय को ओबीसी क्रीमी लेयर तय करने का अकेला आधार नहीं बनाया जा सकता। माता-पिता के पद, सेवा श्रेणी और निर्धारित आय तथा संपत्ति संबंधी नियमों को भी देखा जाना चाहिए।

सीएसई-2025 के अभ्यर्थियों पर इसका असर क्यों पड़ सकता है?

केंद्र के अनुसार, परीक्षा के समय लागू व्याख्या के आधार पर कुछ ऐसे अभ्यर्थी ओबीसी गैर-क्रीमी लेयर का लाभ लेने के योग्य नहीं मानते रहे होंगे, जिनके माता-पिता की आय निर्धारित सीमा से अधिक थी। ऐसे अभ्यर्थियों ने सामान्य श्रेणी में परीक्षा दी हो सकती है या ओबीसी श्रेणी में आवेदन ही नहीं किया होगा। उन्हें ओबीसी अभ्यर्थियों को मिलने वाली तीन साल की ऊपरी आयु सीमा में छूट और अतिरिक्त प्रयास जैसे लाभ भी नहीं मिले होंगे।

क्या दो तरह के अभ्यर्थियों के साथ अलग व्यवहार हो सकता है?

केंद्र ने आशंका जताई है कि जिन अभ्यर्थियों ने ओबीसी श्रेणी में आवेदन किया था, उनका नए फैसले के आधार पर दोबारा आकलन किया जा सकता है। लेकिन जिन लोगों ने ओबीसी के तौर पर आवेदन ही नहीं किया, उन्हें बाद में श्रेणी बदलने या आयु सीमा और अतिरिक्त प्रयास का लाभ देने की समान सुविधा नहीं होगी। केंद्र के मुताबिक इससे उन अभ्यर्थियों के दो समूह बन सकते हैं, जिन्होंने उस समय लागू एक ही प्रशासनिक व्यवस्था के आधार पर निर्णय लिया था।

सेवा आवंटन में देरी का क्या असर पड़ेगा?

केंद्र ने यह भी बताया है कि सीएसई-2025 के लिए लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में फाउंडेशन कोर्स अगस्त के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित है। सेवा आवंटन में देरी होने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का कैडर आवंटन, वरिष्ठता और वेतन निर्धारण प्रभावित हो सकता है। इसका असर अन्य केंद्रीय सेवाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी पड़ सकता है।

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