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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: 'केंद्र मुहैया कराए बुनियादी न्यायिक ढांचा, हम सुनिश्चित करेंगे दिन-रात हो सुनवाई'

Tue, 18 Nov 2025 09:36 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने दुर्दांत अपराधियों के मामलों की जल्द सुनवाई की वकालत करते हुए कहा कि अगर मुकदमा 6 महीनों में पूरा हो जाएगा तो आरोपी के पास जमानत के लिए लंबी सुनवाई का आधार नहीं रहेगा।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह जरूरी न्यायिक बुनियादी ढांचा मुहैया कराए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम सुनिश्चिक करेंगे कि अदालतें रात-दिन काम करें, जिससे देश के खिलाफ अपराध करने वाले और जघन्य अपराधों में शामिल आरोपियों के मुकदमों की सुनवाई 6 महीनों में पूरी हो।

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जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर की पीठ ने दुर्दांत अपराधियों के मामलों की जल्द सुनवाई की वकालत करते हुए कहा कि अगर मुकदमा 6 महीनों में पूरा हो जाएगा तो आरोपी के पास जमानत के लिए लंबी सुनवाई का आधार नहीं रहेगा। 

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी से कहा, "आप बस आवश्यक बुनियादी ढांचा मुहैया कराएं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अदालतें छह महीने में मुकदमा पूरा करने के लिए दिन-रात काम करें।"
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एएसजी ने दलील दी कि केंद्रीय गृह सचिव इस मामले से अवगत हैं. एएसजी ने कहा कि विशेष एनआईए अदालतों और विशेष कानूनों के लिए समर्पित अन्य कोर्ट की स्थापना के मुद्दे पर विभिन्न राज्य सरकारों के साथ बैठक हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आजकल मुकदमेबाजी की लागत बहुत ज्यादा है और अगर मुकदमा छह महीने में पूरा हो जाए तो यह सभी पक्षों के लिए फायदेमंद होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनआईए को गवाहों की गवाही के लिए अदालतों की ऑनलाइन सुविधा का लाभ उठाना चाहिए, जिससे वे दूर-दराज की जगहों से भी स्वतंत्र रूप से गवाही दे सकें। 

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, "आपको गवाह सुरक्षा योजना के तहत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और उन्हें श्रीनगर या अन्य दूर-दराज के स्थानों से दिल्ली आने की जरूरत नहीं है।" एनआईए के मामलों में बड़ी संख्या में गवाहों के शामिल होने के मुद्दे पर पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष को बड़ी सूची को छोटा करना चाहिए और सबसे विश्वसनीय गवाहों पर भरोसा करना चाहिए।

भाटी ने आश्वासन दिया कि गृह मंत्रालय पहले से ही इन मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहा है, और जल्द ही अदालत के समक्ष एक रोडमैप प्रस्तुत किया जाएगा। इससे पहले माओवादी समर्थक कैलाश रामचंदानी और यूएपीए के तहत एक कुख्यात अपराधी महेश खत्री से जुड़े एनआईए मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष कानूनों के तहत मामलों के लिए अदालतें न बनाने के लिए केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की थी।

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