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Supreme Court: कोर्ट में फिर गूंजेगा भूमि अधिग्रहण मुआवजे का मुद्दा, पुनर्विचार याचिका मंजूर; कब होगी सुनवाई?

Wed, 05 Nov 2025 07:11 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएआई की उस याचिका पर पुनर्विचार स्वीकार किया है जिसमें 2019 के उस फैसले की समीक्षा मांगी गई थी, जिसमें किसानों को अधिग्रहित भूमि पर अतिरिक्त मुआवजा और ब्याज देने का आदेश दिया गया था। अदालत ने कहा कि मामला 11 नवंबर को खुले न्यायालय में सुना जाएगा। यह विवाद 32 हजार करोड़ रुपये तक के असर वाला माना जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की उस पुनर्विचार याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें किसानों को भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा और ब्याज देने से जुड़े उसके 2019 के फैसले की समीक्षा की मांग की गई है। अब यह मामला 11 नवंबर को खुले न्यायालय (ओपन कोर्ट) में सुनवाई के लिए तय किया गया है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने मंगलवार को याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा, मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को दोपहर तीन बजे होगी।

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सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस फैसले का असर देशभर में लगभग 32 हजार करोड़ रुपये तक हो सकता है। पहले एनएचएआई ने अपने आवेदन में इसका अनुमान 100 करोड़ रुपये बताया था। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 4 फरवरी को एनएचएआई की एक याचिका खारिज करते हुए अपने 2019 के तरसेम सिंह फैसले को बरकरार रखा था।

उस फैसले में कहा गया था कि जिन किसानों की जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम के तहत अधिगृृहीत की गई है, उन्हें भी भूमि अधिग्रहण कानून 1894 के तहत मिलने वाले ‘सोलाटियम’ (अतिरिक्त मुआवजा) और ब्याज का लाभ मिलेगा। एनएचएआई का तर्क था कि यह फैसला केवल भविष्य के मामलों में लागू होना चाहिए ताकि पहले से निपटे मामलों को दोबारा न खोला जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में कहा था कि ऐसा करने से समान परिस्थिति  वाले किसानों के बीच असमानता (अनुच्छेद 14 का उल्लंघन) उत्पन्न होगी।
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अधिगृृहीत जमीन पर सभी को समान मुआवजा और ब्याज की है मांग
अदालत ने 2019 में स्पष्ट किया था कि धारा 3(जे), जो भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत मिलने वाले लाभों को बाहर करती है, संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत है। इसलिए, जिन किसानों की जमीन 1997 से 2015 के बीच एनएचएआई ने अधिगृृहीत की, उन्हें भी समान रूप से मुआवजा और ब्याज मिलना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा था कि यदि फैसला केवल आगे से लागू किया गया, तो 31 दिसंबर 2014 को जिनकी जमीन ली गई, उन्हें लाभ नहीं मिलेगा, जबकि 1 जनवरी 2015 को जिनकी जमीन अधिगृृहीत हुई, उन्हें लाभ मिल जाएगा, जो अन्यायपूर्ण स्थिति होगी। अब एनएचएआई की पुनर्विचार याचिका पर खुले न्यायालय में होने वाली सुनवाई से यह मामला फिर एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आगामी फैसले का असर देशभर के हजारों किसानों और सरकार दोनों पर पड़ सकता है।

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