सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्य सचिव को एक हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया है कि असम में हिरासत केंद्रों से विदेशियों की रिहाई के बारे में क्या उपाय अपनाए जा रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, "हिरासत केंद्रों में विदेशियों को अनिश्चित काल तक के लिए हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। असम सरकार को उन्हें छोड़ने के लिए जमानत और पुलिस को सूचित करने जैसे सुरक्षा उपायों पर विचार करने का सुझाव दिया गया है।"
इससे पहले मार्च के महीने में सुप्रीम कोर्ट अवैध प्रवासियों को वापस भेजने में ढिलाई बरतने पर असम सरकार को फटकार लगा चुकी है। कोर्ट ने कहा कि काफी लंबा समय बीत चुका है, लेकिन सरकार अब तक इन लोगों को वापस नहीं भेज सकी है। शीर्ष अदालत ने विदेशी ट्रिब्यूनल के कामकाज पर भी नाराजगी जताई।
इससे पहले जनवरी के महीने में सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार से असम में चल रहे हिरासत केंद्रों और पिछले 10 साल के दौरान वहां हिरासत में लिए गए विदेशी नागरिकों की संख्या समेत विभिन्न ब्यौरे मांग चुकी है।
शीर्ष अदालत ने केंद्र से हिरासत केंद्रों, वहां बंद बंदियों की अवधि और विदेशी नागरिक अधिकरण के समक्ष दायर उनके मामलों की स्थिति को लेकर विभिन्न विवरण मांगे थे। पीठ ने कहा, “हम यह जानना चाहते हैं कि वहां कितने हिरासत केंद्र हैं। हम यह भी जानना चाहते हैं कि वहां कितने लोग बंद हैं और कब से।”