सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी खड़गपुर के एक छात्र और कोटा में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा के आत्महत्या करने की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दोनों मामलों में रिपोर्ट तलब की है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जानना चाहा कि इन दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है या नहीं। पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की रोकथाम से निपटने के लिए नेशनल टास्क फोर्स के गठन के लिए दो सप्ताह में रजिस्ट्री में 20 लाख रुपये जमा करवाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से छात्रों की आत्महत्याओं के चिंताजनक पैटर्न की रिपोर्ट पर गौर करते हुए कहा कि छात्रों को अपनी जान लेने के लिए मजबूर करने वाले विभिन्न कारकों को से निपटने के लिए अधिक मजबूत, व्यापक और जवाबदेह तंत्र बनाने की तत्काल आवश्यकता है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि आईआईटी छात्र 4 मई को अपने छात्रावास के कमरे में फंदे से लटका मिला था। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि मृत्यु से कुछ देर पहले वह दिल्ली में अपने दोस्त के साथ वीडियो कॉल पर बात कर रहा था। पीठ ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि छात्रों के आत्महत्या करने की ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से ही टास्क फोर्स का गठन किया गया है। मृत छात्र मोहम्मद आसिफ बिहार के शिवहर का रहने वाला था।
कोर्ट ने कहा कि उसने मामले का संज्ञान यह पता लगाने के लिए किया है कि क्या आईआईटी, खड़गपुर के प्रबंधन या प्रशासन ने पूर्व निर्देशों के अनुसार स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पीठ ने राजस्थान के कोटा में नीट अभ्यर्थी के आत्महत्या की घटना का जिक्र करते हुए कहा, किसी कोचिंग विद्यार्थी के आत्महत्या का यह चौदहवां मामला है। हम जानना चाहेंगे कि क्या इस आत्महत्या के संबंध में भी प्राथमिकी दर्ज की गई है या नहीं। छात्रा मध्य प्रदेश के श्योपुर की रहने वाली थी और अपने माता-पिता के साथ कोटा में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी।
13 मई को होगी सुनवाई
कोर्ट ने रजिस्ट्री को दोनों जगहों से यथाशीघ्र रिपोर्ट तलब करने का निर्देश दिया। इसके बाद मामले को 13 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। शीर्ष अदालत ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए इसी साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस रविन्द्र भट की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनाई थी।