उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़ने का आदेश दिया है। अब इन सभी मामलों की सुनवाई तीन जजों की विशेष बेंच करेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देशभर में संगठित अपराध पर सख्त कानूनों को लेकर बहस जारी है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश कर रहे थे, ने कहा कि अलग-अलग अदालतों में चल रही याचिकाओं को एक साथ सुनना जरूरी है ताकि एक समान और स्पष्ट फैसला दिया जा सके। कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है। यह कानून 1986 में बनाया गया था, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध, डकैती और असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाना है।
क्या है मामला और कोर्ट ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील ने कहा कि इस कानून की कुछ धाराएं संविधान के खिलाफ हैं और इनकी वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग बेंच में एक जैसे मामलों की सुनवाई से भ्रम की स्थिति बन रही है। कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को टैग करने का आदेश देते हुए कहा कि अब एक ही बेंच इस पर फैसला करेगी।
क्या अन्य राज्यों में भी ऐसे कानून हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में भी संगठित अपराध से निपटने के लिए इसी तरह के कानून बनाए गए हैं। इन कानूनों का मकसद अपराधी नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करना और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाना है।
क्या बेंच हंटिंग का मुद्दा उठा?
सुनवाई के दौरान बेंच हंटिंग यानी मनचाही बेंच चुनने का मुद्दा भी उठा। हालांकि याचिकाकर्ता पक्ष ने इससे इनकार किया और कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले खारिज हुई याचिका को अंतिम कानूनी फैसला नहीं माना जा सकता क्योंकि उस पर विस्तार से सुनवाई नहीं हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी लंबित याचिकाएं तीन जजों की बेंच के सामने रखी जाएं। जो मामले पहले से आंशिक रूप से सुने जा चुके हैं, उन्हें ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। अब इस मामले में आने वाला फैसला न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों के ऐसे कानूनों पर भी असर डाल सकता है।
अन्य वीडियो-