देश की सर्वोच्च अदालत ने वकीलों को जांच एजेंसियों द्वारा समन भेजने की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर खुद संज्ञान लेते हुए स्वत: संज्ञान में मामला शुरू किया है। अदालत यह तय करेगी कि क्या सिर्फ कानूनी सलाह देने वाले वकीलों को सीधे जांच एजेंसियों द्वारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है या नहीं। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ 14 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करेगी, जब ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद अदालत फिर से खुलेगी।
हालांकि, जांच एजेंसी ने बाद में अपने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने मुवक्किलों के खिलाफ धन शोधन की जांच में किसी भी वकील को समन जारी न करें। ईडी ने 20 जून को जारी एक पत्र में आगे कहा कि इस नियम में कोई भी अपवाद केवल उसके निदेशक की अनुमति के बाद ही किया जा सकता है। यह मामला तब सामने आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वरिष्ठ वकीलों अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को समन भेजा।
क्या था पूरा मामला?
दोनों वकीलों ने केयर हेल्थ इंश्योरेंस लिमिटेड को एक कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना पर कानूनी राय दी थी। यह योजना रिलिगेयर एंटरप्राइजेज की पूर्व अध्यक्ष रश्मि सलूजा से जुड़ी थी। वकीलों को समन भेजे जाने पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
ईडी ने वरिष्ठ वकीलों अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को तलब किया था। 25 जून को न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि वकीलों को सीधे समन भेजना न्याय व्यवस्था की स्वतंत्रता के लिए खतरा है। अदालत ने कहा कि वकील न केवल प्रशासनिक न्याय का हिस्सा हैं, बल्कि उन्हें बिना डर के काम करने की आजादी होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मुद्दा सिर्फ एक पेशेवर पर असर नहीं डालता, बल्कि पूरी न्याय प्रणाली पर असर डालता है।
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सुप्रीम कोर्ट के दो अहम सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने दो अहम सवाल उठाए हैं। पहला, जब कोई व्यक्ति केवल कानूनी सलाह देता है, तो क्या उसे जांच एजेंसी सीधे समन कर सकती है? दूसरा, अगर किसी वकील की भूमिका वकील से बढ़कर है, तब भी क्या उसे सीधे समन करना उचित है या न्यायिक निगरानी जरूरी है? कोर्ट ने कहा कि इन सवालों पर व्यापक चर्चा और नीतिगत स्पष्टीकरण जरूरी है।
संवैधानिक अधिकारों की भी चर्चा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वकील न केवल अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत पेशे का अधिकार रखते हैं, बल्कि उन्हें पेशे से जुड़े विशेषाधिकार और सुरक्षा भी मिलती है। अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी है, जिसमें एक वकील को पुलिस द्वारा समन किए जाने को सही ठहराया गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को तब तक वकील को न बुलाने का आदेश दिया है।
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महत्वपूर्ण संस्थाओं से मांगी गई राय
इस अहम मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और दोनों वकील संगठनों के अध्यक्षों से राय मांगी है। यह मामला 14 जुलाई को गर्मियों की छुट्टियों के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट की यह पहल कानूनी पेशे की स्वतंत्रता और न्याय व्यवस्था की गरिमा को बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।