सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बाल यौन शोषण मामले की सुनवाई करते हुए साफ कहा कि बाल विवाह मामलों में चाइल्ड रेप कानून का इस्तेमाल कर सकते हैं। कोर्ट ने ये भी कहा कि बाल विवाह से बाल यौन शोषण की वारदातों को रोका नहीं जा सकता।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में इंडियन पैनल कोड की आईपीसी धारा 375 के खिलाफ याचिका डाली गई थी। इसके अनुच्छेद 2 के तहत अगर किसी शख्स की पत्नी 15 से 18 साल से नीचे है और वो उसके साथ संबंध बनाता है तो इसे रेप नहीं माना जाएगा।
सर्वोच्च न्यायलय ने कहा कि शादी ने नाम पर आप बाल यौन शोषण के आरोपों से छुटकारा नहीं पा सकते। कोर्ट ने ये भी कहा कि देश में बाल विवाह के खिलाफ कानून बने हुए हैं इसके बावजूद आज भी शादियां धड़ल्ले से हो रही हैं।
वकील गौरव अग्रवाल के सहयोगी विक्रम श्रीवास्तव ने कहा कि आईपीसी 375 के सेक्शन 2 की वजह से आर्टिकल 14 का उल्लंघन हो रहा है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ये बेहद गंभीर मामला है और ये भी कहा कि अगर इस मामले में छूट दे दी जाती है तो उन बच्चों का क्या जो इन शादियों के बाद होते हैं। वकील अग्रवाल ने कोर्ट से कहा कि जिस तरह तीन तलाक के खिलाफ गंभीर कदम उठाया गया है, उसी तरह इस पर भी फैसला लिया जाए।