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सीएमआरएल मामला: पिनाराई विजयन को सुप्रीम कोर्ट से राहत, एक हफ्ते तक जांच पर रोक; ईडी को दी क्या हिदायत?

Wed, 21 Oct 2026 01:22 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में जांच पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। अदालत ने एफआईआर को बरकरार रखते हुए केरल हाईकोर्ट से विजयन की अपील पर सुनवाई करने को कहा।
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ईडी को सुप्रीम कोर्ट ने दी सख्त हिदायत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को कथित सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में राहत देते हुए उनके खिलाफ जांच पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी। अदालत ने केरल हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ विजयन की अपील पर सुनवाई करे।
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जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ विजयन, उनकी बेटी वीणा और उनके पति मोहम्मद रियास की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से साझा की गई जानकारी के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

हाईकोर्ट के जल्दबाजी में आदेश देने पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जल्दबाजी में आदेश देने पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही मामले की प्रारंभिक जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर चुकी थी। ऐसे में विजयन का पक्ष सुने बिना एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की जरूरत पर विचार किया जाना चाहिए था।
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एक सप्ताह तक जांच पर रोक, एफआईआर रहेगी बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर को रद्द नहीं किया जा रहा है, लेकिन अपील पर फैसला होने तक जांच आगे नहीं बढ़ेगी। अदालत ने यह रोक विजयन को केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील दायर करने और सुनवाई का अवसर देने के लिए लगाई है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि एफआईआर दर्ज हो चुकी है और फिलहाल उसे बरकरार रहने दिया जाएगा, लेकिन जांच पर रोक रहेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में जांच रोकने का फैसला हाईकोर्ट के आदेश और संबंधित कानूनी सवालों पर अपीलीय मंच के विचार करने तक लागू रहेगा।

ईडी को दूसरी एजेंसियों के काम में दखल न देने की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र की सीमा में रहने की हिदायत दी। पीठ ने कहा कि किसी एजेंसी को अपने वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल दूसरी जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में दखल देने के लिए नहीं करना चाहिए। जस्टिस बागची ने कहा, "आप अपनी अभियोजन प्रक्रिया आगे बढ़ाइए। अपने वैधानिक अधिकारों की सीमा से आगे मत जाइए। हम यह बात स्पष्ट कर रहे हैं। वैधानिक शक्तियों की प्रक्रिया का इस्तेमाल दूसरी संस्थाओं के वैधानिक अधिकार क्षेत्र में दखल देने के लिए न करें।"

अदालत ने यह भी कहा कि ईडी धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपनी जांच और अभियोजन से जुड़ी कार्रवाई आगे बढ़ा सकती है, लेकिन उसे दूसरी एजेंसियों के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

प्रारंभिक जांच पूरी होने से पहले एफआईआर की मांग पर सवाल
यह मामला तब सामने आया जब केरल की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने शुरुआत में एफआईआर दर्ज करने के बजाय प्रारंभिक जांच कराने का फैसला लिया था। इसके खिलाफ कार्यकर्ता और वकील केएम शाहजहां ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया। ईडी ने भी शाहजहां की इस दलील का समर्थन किया था कि उसकी ओर से दी गई जानकारी के आधार पर राज्य पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। इसके बाद हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने 9 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि शाहजहां ने राज्य की एसआईटी की प्रारंभिक जांच पूरी होने का इंतजार किए बिना हाईकोर्ट में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।

क्या है सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला?
यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) की ओर से पिनाराई विजयन की बेटी वीणा की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को कथित तौर पर किए गए भुगतान से जुड़ा है। ईडी ने आरोप लगाया है कि कंपनी को आईटी परामर्श सेवाओं के नाम पर 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। एजेंसी ने इस मामले में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग की थी।
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