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Supreme Court: मल्टीप्लेक्स द्वारा टिकट रिकॉर्ड रखने के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर 'सुप्रीम' रोक; दिए निर्देश

Mon, 03 Nov 2025 06:48 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कर्नाटक सरकार ने अक्तूबर में एक अधिसूचना जारी कर टिकटों की अधिकतम कीमत 200 रुपये तय की थी। सरकार की दलील थी कि इससे सभी वर्ग के लोग सिनेमा देख पाएंगे। इस पर  मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यह व्यापार करने के अधिकार और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मल्टीप्लेक्स में सिनेमा टिकट के साथ-साथ खाने-पीने की चीजों की अत्यधिक दरों पर चिंता जताई। शीर्ष अदालत ने कहा, पानी की बोतल के 100 रुपये, कॉफी 700 रुपये में मिलती है। अगर मल्टीप्लेक्स की दरें तय नहीं की गईं तो सिनेमाघर खाली हो जाएंगे। शीर्ष अदालत ने इस टिप्पणी के साथ कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें मल्टीप्लेक्स को बेचे गए प्रत्येक फिल्म टिकट का व्यापक और ऑडिट योग्य रिकॉर्ड रखने को कहा गया था।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया व अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। मल्टीप्लेक्स में अत्यधिक दरों का हवाला देते हुए, जस्टिस नाथ ने कहा, आप पानी की बोतल के लिए 100 रुपये और कॉफी के लिए 700 रुपये लेते हैं। मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, ताज कॉफी के लिए 1000 रुपये लेगा, क्या आप इसे तय कर सकते हैं? यह पसंद का मामला है। इस पर जस्टिस नाथ ने कहा, लेकिन यह (दरें) तय होनी चाहिए। यह पसंद का मामला वाले तर्क पर जस्टिस नाथ ने कहा, चूंकि सिनेमा का पतन हो रहा है, इसलिए लोगों के आने और आनंद लेने के लिए इसे और अधिक उचित बनाया जाना चाहिए, अन्यथा सिनेमा हॉल खाली हो जाएंगे। पीठ ने याचिकाओं पर नोटिस जारी किया और उच्च न्यायालय की शर्तों पर रोक लगा दी।

 तो फिर इसे खाली रहने दें, आप सामान्य सिनेमाघर में जा सकते हैं
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रोहतगी ने कहा, तो इसे खाली रहने दो, यह सिर्फ मल्टीप्लेक्स के लिए है। आप सामान्य सीनेमाघरों में जा सकते हैं। आप सिर्फ यहीं क्यों आना चाहते हैं? इस पर जस्टिस नाथ ने कहा, अब कोई सामान्य मल्टीप्लेक्स नहीं बचा है। हम खंडपीठ के इस फैसले से सहमत हैं कि यह 200 होना चाहिए। रोहतगी ने कहा, यह पसंद का मामला है।

 खंडपीठ की लगाई शर्तें अव्यावहारिक
रोहतगी ने कहा, खंडपीठ की लगाई गई शर्तें अव्यावहारिक हैं। उन्होंने नकद भुगतान करने वालों के पहचान पत्र का विवरण लेने के निर्देश पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि खातों और खरीदारों की पहचान पर नजर रखना संभव नहीं है, क्योंकि अधिकतर टिकट बुकमाईशो जैसे ऑनलाइन माध्यमों से बुक किए जाते हैं। रोहतगी ने कहा, हमारे काबिल जजों का मानना है कि टिकट काउंटर से बेचे जाते हैं। टिकट बुकमाईशो के जरिये बिक रहे हैं। उनके पास विवरण होंगे। मैं कोई विवरण या पहचान पत्र नहीं रखता। कोई भी टिकट खरीदने काउंटर पर नहीं जाता।उन्होंने यह भी कहा कि टिकट खरीदने के लिए कौन पहचान पत्र लेकर जाता है?

 क्या है पूरा मामला?
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आपको बता दें कि कर्नाटक सरकार ने अक्तूबर में एक अधिसूचना जारी कर टिकटों की अधिकतम कीमत 200 रुपये तय की थी। सरकार की दलील थी कि इससे सभी वर्ग के लोग सिनेमा देख पाएंगे। इस पर  मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यह व्यापार करने के अधिकार और समानता के अधिकार का उल्लंघन है। उनकी दलीलों को मानते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट की एकलपीठ ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी।
 
कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 30 सितंबर को यह निर्देश कर्नाटक सिनेमा (विनियमन) संशोधन नियम, 2025 को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया था। इस संशोधन में सिनेमा टिकट की अधिकतम कीमत ₹200 तय करने का प्रावधान किया गया है।

सभी डेटा सुरक्षित रखें
उससे पहले, 23 सितंबर को अदालत की सिंगल जज बेंच ने इस नियम पर अंतरिम स्थगन आदेश दिया था। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सभी मल्टीप्लेक्स को बेचे गए हर टिकट का रिकॉर्ड रखना होगा। इन रिकॉर्ड में बिक्री की तारीख, बुकिंग का तरीका, भुगतान का तरीका, जीएसटी सहित वसूली गई राशि का विवरण होना चाहिए। इसके अलावा सभी नकद लेनदेन रसीदें और प्रबंधक द्वारा हस्ताक्षरित कैश रजिस्टर भी रखे जाएं। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह निर्देश फिलहाल लागू नहीं रहेगा।

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