एक गर्भवती महिला द्वारा अपने 22 हफ्ते के गर्भ को गिराने की इजाजत मांगने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महिला की चिकित्सकीय जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। मुंबई में रहने वाली इस महिला का कहना है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को न्यूरो से संबंधित परेशानी है।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुंबई के जेजे अस्पताल के तीन विभागों के प्रमुखों वाली एक मेडिकल टीम का गठन किया है। पीठ ने मेडिकल टीम से कहा कि दो दिनों के भीतर महिला की मेडिकल जांच हो जानी चाहिए।
पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के वकील निशांत कटलेशवरकर को सुनवाई की अगली तारीख 28 फरवरी को सीलबंद लिफाफे में मेडिकल रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। सुनवाई के दौरान महिला की ओर से पेश वकील ने कहा कि एक डॉक्टर की ने राय दी है कि गर्भ में पल रहे बच्चे में न्यूरो संबंधी परेशानी है। इस परेशानी केआगे और बढ़ने के आसार हैं।