लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने के लिए केंद्र व चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका में दावा किया गया है कि एक साथ चुनाव कराने से जनता के पैसे और श्रमबल की बचत होगी।
चीफ जस्टिस दिपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने दिल्ली भाजपा के नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका को उसके सामने लंबित इसी तरह की एक अन्य याचिका के साथ संलग्न कर दिया।
याचिका में अधिकारियों को मतों की गणना के लिए ‘टोटलाइजर’ का इस्तेमाल करने का आदेश देने की भी मांग की गई है। यह एक ऐसा डिवाइस है जिसकी मदद से 14 पोलिंग बूथों पर पड़े मतों को एक साथ गिना जा सकता है।
याचिका में चुनाव नियमों का आचरण, 1961 का हवाला दिया गया है, जिसके तहत ईवीएम में दर्ज मतों को पोलिंग स्टेशन के आधार पर गिना जाता है। याचिका में कहा गया है कि इससे ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है कि विभिन्न जगहों अथवा पॉकेट्स में पड़े वोटों के पैटर्न का पता सभी को लग जाता है।
याचिकाकर्ता ने यह प्रस्ताव भी दिया है कि पोस्ट ऑफिस को वोटर रजिस्ट्रेशन एवं वेरिफिकेशन के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे न सिर्फ दोहराव और भ्रम की स्थिति दूर होगी बल्कि बड़े पैमाने पर जनता का पैसा और श्रमबल भी बचेगा। याचिका में ज्यादा संख्या में मतदान के लिए कई अन्य देशों की तरह चुनाव रविवार को कराए जाने की भी मांग की गई है।