सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आगरा में ताजमहल के करीब नया नागरिक एयरपोर्ट बनाए जाने को लेकर पर्यावरणविद एमसी मेहता से केंद्र सरकार के हलफनामे पर जवाब मांगा है। केंद्र सरकार ने हलफनामा में कहा है कि वह एयरपोर्ट निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देने को तैयार है। मेहता ने 1984 में ताजमहल और उसके चारों तरफ के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की मांग वाली जनहित याचिका दाखिल की थी।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस बीआर गवई की पीठ शुक्रवार को मेहता की लंबित जनहित याचिका में बहुत सारे अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई कर रही थी। इनमें से एक ताजमहल सहित चार विश्व धरोहर स्थलों की मौजूदगी वाले ताज ट्रैपेजियम जोन (टीटीजेड) के तहत नागरिक एयरपोर्ट के निर्माण से संबंधित है।
टीटीजेड को पर्यावरणीय संवेदनशील श्रेणी में रखा जाता है और यह आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस व एटा तथा राजस्थान के भरतपुर जिलों में करीब 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।
केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एएनएस नाडकर्णी ने कहा कि पर्यावरण व वन मंत्रालय ने इस एयरपोर्ट के निर्माण के संबंध में एक हलफनामा दाखिल किया है और वह इस परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी देने को तैयार है। उन्होंने पीठ को बताया कि परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और इसके लिए टेंडर भी आमंत्रित किए जा चुके हैं।
एएसजी की इस दलील का मेहता की तरफ से विरोध किया गया और उन्होंने पीठ से इसके जवाब में एक हलफनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी। इस पर पीठ ने अनुमति दे दी।
हालांकि पीठ ने यह भी सवाल किया कि जब आगरा में पहले से ही विमान उतरते रहे हैं तो आपको क्या ऐतराज है? इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि ताजमहल के संरक्षण का विजन डॉक्यूमेंट अदालत में दाखिल किया जा चुका है। पीठ ने अब विभिन्न अंतरिम याचिकाओं पर अगले बुधवार को सुनवाई करने का निर्णय लिया है।