सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण राहत कोष के एक हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं होने और निष्क्रिय हालत में पड़े होने के लिए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की भी तारीफ की। आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पर्यावरण राहत कोष में जमा 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का अब तक उपयोग नहीं किया गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता ज्ञान प्रकाश की ओर से कहा गया कि वर्षों से निष्क्रिय पड़े इस राहत कोष का इस्तेमाल सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए था।
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सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की तारीफ की
याचिकाकर्ता के प्रयासों की तारीफ करते हुए पीठ ने कहा कि वर्ष 2019 में दायर इस जनहित याचिका में पर्यावरण राहत कोष के कथित गैर-उपयोग का मुद्दा उठाया गया है। केंद्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि वर्ष 2020 तक इस कोष में कुल 881 करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए थे, जो बाद में बढ़कर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गए।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पर्यावरण राहत कोष योजना वर्ष 2008 में बनाई गई थी, लेकिन इसके तहत अब तक किसी भी लाभार्थी को कोई राशि वितरित नहीं की गई है। जब अदालत को बताया गया कि इस कोष का प्रबंधन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कर रहा है, तब पीठ ने केंद्र सरकार और बोर्ड के सदस्य सचिव को नोटिस जारी कर कोष के उपयोग या गैर-उपयोग के संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
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पीठ ने केंद्र सरकार और CPCB से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि इस कोष के उपयोग के लिए कोई व्यवस्था या योजना मौजूद है या नहीं, और अगर है तो अब तक राशि का वितरण क्यों नहीं किया गया?