भारत समेत दुनियाभर में जानलेवा कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते संक्रमण से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को एहतियात बरतने की नसीहत देते हुए कहा, ऐसी महामारी हर सौ साल में एक बार होती है। घोर कलियुग में हम वायरस से लड़ नहीं सकते। इंसान की कमजोरी देखिए, आप हर तरह हथियार ईजाद कर सकते हैं लेकिन आप ऐसे वायरस से लड़ नहीं सकते। इससे हमें अपने स्तर पर ही लड़ना होगा। सिर्फ सरकारी स्तर पर जारी लड़ाई पर्याप्त नहीं है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए बृहस्पतिवार से सुप्रीम कोर्ट में आधा स्टाफ ही ड्यूटी पर आएगा। सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार से केवल चार पीठ ही बैठेंगी। केवल जरूरी मामलों की ही सुनवाई होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने छह पीठ बैठाने का निर्णय लिया था। इससे पहले भी शीर्ष अदालत ने 31 मार्च तक केवल जरूरी मामलों की सुनवाई की बात कही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र व सभी राज्यों को एकसमान नीति को लेकर यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के क्रम में स्कूलों के बाद होने से बच्चों व आंगनवाड़ी के जरिए महिलाओं को मिलने वाले पौष्टिक आहार से वंचित न रहना पड़े। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए एक समस्या को निपटने में दूसरी समस्या पैदा हो जाए।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर पूछा कि स्कूल बंद किए जाने पर बच्चों को मिड-डे मील कैसे उपलब्ध कराया जा रहा है? पौष्टिक आहार न मिलने से वे कुपोषण का शिकार होंगे, जिससे उनके संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा।