सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पराली जलाने से रोकने के लिए एक ठोस नीति का होना जरूरी है। अगर इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह समस्या हमेशा के लिए रहेगी। कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के मुख्य सचिवों को विस्तृत हलफनामा दायर कर बताने को कहा कि पराली जलाने से रोकने को लेकर उनकी ओर से क्या उपाय किए गए हैं।
जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन राज्यों से जानना चाहा कि पंचायत स्तर पर पराली जलाने से बचने को जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है या नहीं? पंजाब की ओर से पेश वकील ने कहा कि हम ऐसी मशीन लाने कीतैयारी कर रहे हैं जिससे पराली को गलाया जाएगा और उसका इस्तेमाल किसी और चीज के लिए किया जा सकेगा।
पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि कोरोना महामारी के कारण उसे वित्तीय समस्या भी है। ऐसे में सरकार ऐसी स्थिति में नहीं है कि वह पराली जलाने से रोकने के लिए मशीन खरीदने के लिए किसानों को सब्सिडी दे सकें।
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों का क्या र्हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से यह भी बताने के लिए कहा है कि प्रदूषण फैलाने वाली फैलाने वाले उद्योग से निपटने के लिए वह क्या कर रही है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि कितनी फैक्ट्रियों का चालान किया गया है।
अब भी प्रदूषण पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा है कि सभी प्रदूषण वाले हॉट स्पॉट के लिए एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इस दौरान अदालत ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कुछ हॉटस्पॉट के आकार कम हुए हैं लेकिन प्रदूषण पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ हैं।