सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि आपराधिक मामलों की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों की गुणवत्ता अहम है न कि मात्रा। शीर्ष कोर्ट ने 30 साल पुराने हत्या के मामले में आरोपी की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा, केवल इसलिए कि अभियोजन के गवाह को अन्य आरोपी के संदर्भ में विश्वास नहीं है, उसकी गवाही की अवहेलना नहीं की जा सकती।
शीर्ष कोर्ट ने कहा, 'गवाह के बयान के एक हिस्से पर भी भरोसा किया जा सकता है जबकि बयान के कुछ हिस्सों पर अदालत को पूरी तरह विश्वास नहीं भी हो सकता है।' पीठ ने कहा, 'भारत की अदालतों द्वारा ‘एक बात में असत्य, हर बात में असत्य’ का नियम लागू नहीं किया जाता है। अभियोजन के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह घटना के सभी गवाहों की जांच कर सके।'
ठ ने कहा, 'आपराधिक मामलों की सुनवाई के दौरान साक्ष्य की विशेषता प्रासंगिक है, मात्रा नहीं।' उत्तर प्रदेश निवासी राम विजय सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उसे हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।