देश की सर्वोच्च अदालत ने देश के विभिन्न हिस्सों में हुई उन घटनाओं का संज्ञान लिया जिनमें स्वास्थ्य कर्मचारियों और डॉक्टरों पर हमला किया गया और उनके साथ अभद्रता की गई। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राज्य और पुलिस प्रशासन का दायित्व है कि उन सभी जगहों पर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराए जहां कोरोना के संक्रमित मरीज पाए गए हैं या जहां लोगों को क्वारंटीन किया गया है और जहां लोगों की जांच के लिए मेडिकल स्टाफ को जाना होता है।
इस दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, ऐसे संकट के दौर में डॉक्टरों की सैलरी काटी जा रही है। उनके कडे़ श्रम के बिना पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। इस पर मेहता ने कहा, जो भी डॉक्टरों की सैलरी काटेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
मेडिकल उपकरण का कर रहे इंतजाम
मेहता ने बताया, पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर समेत सभी मेडिकल उपकरण का तेजी से इंतजाम किया जा रहा है। पॉजिटिव लोग किसी को प्रभावित न करें, इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस रविंद्र भट्ट की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि क्या केंद्र के लिए ऐसा तंत्र स्थापित करना संभव है, जिसमें बड़े पैमाने पर जनता से मिले सुझावों का केवल लॉकडाउन के लिए ही नहीं बल्कि चीजों की नियामक योजना में भी इस्तेमाल किया जा सके।
मेहता ने कहा, पुलिस और सरकार ने हर बंदोबस्त किया है। अदालत डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स को पर्याप्त संख्या में पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर, और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
वकीलों ने की आपात कोष बनाने की मांग
लॉकडाउन को देखते हुए वकीलों ने देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर एक आपात कोष बनाए जाने की मांग की है, ताकि जरूरतमंद युवा वकीलों की आर्थिक मदद की जा सके।