कुछ तो है। यह कहते हुए
सुप्रीम कोर्ट ने महात्मा गांधी की हत्या की फिर से जांच करने की मांग वाली याचिका पर परीक्षण करने का निर्णय लिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले वह देखेगा कि इतने वर्षों के बाद इस मामले को फिर से खोला जाना चाहिए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का यह कहना कि मामले में कुछ तो है इस मायने में अहम है क्योंकि अदालत द्वारा नियुक्त न्याय-मित्र (अमाइकस क्यूरी) वरिष्ठ वकील अमरेन्द्र शरण का मानना है कि
महात्मा गांधी की हत्या की फिर से जांच करने की कोई जरूरत नहीं है।
न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर की पीठ ने सोमवार को कहा कि वह इस मामले में विस्तृत सुनवाई की दरकार है लिहाजा इसकी सुनवाई नॉन-मिसलिनियस डे के दिन की जाएगी। पीठ ने कहा कि पहले वह यह तय करेगी कि इतने वर्षों के बाद मामले को खोला जाना चाहिए या नहीं? पीठ ने यह भी कहा कि हम इस बात से अवगत हैं कि कुछ तकनीक ऐसी उपलब्ध हो जो कुछ और पता लगाया जा सकता है लेकिन सवाल यह है कि हमें अभी यह करना चाहिए या नहीं? पीठ छह मार्च को इस पर सुनवाई करेगी।
शीर्ष अदालत शोधकर्ता व अभिनव भारत के ट्रस्टी पंकज फडणीस की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता ने गांधी की हत्या में विदेशी खुफिया एजेंसी का हाथ होने की आशंका जताई है। याचिकाकर्ता ने जांच नए सिरे से कराने की गुहार की है। मालूम हो कि गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे और आप्टे को 15 नवंबर 1949 को फांसी दी गई थी।
इस मामले में शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ वकील अमरेन्दर शरण ने अपनी रिपोर्ट में कहा है याचिकाकर्ता का आरोप बेबुनियाद है कि महात्मा गांधी की हत्या में विदेशी खुफिया एजेंसी का हाथ है। याचिकाकर्ता के पास इस दावे को लेकर कोई साक्ष्य नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया कि इसके सबूत नहीं है कि गांधी की हत्या किसी अज्ञात व्यक्ति ने की थी न कि गोडसे ने। न्याय मित्र ने याचिकाकर्ता की इस थ्योरी को नकार दिया कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा चलाई गई चौथी गोली से गांधी की मृत्यु हुई। ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह शक होता है गोली किसी अज्ञात व्यक्ति ने चलाई थी।