सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को टिप्पणी करते हुए कहा कि बाघ अभयारण्यों की सीमाओं से एक किलोमीटर के दायरे में खनन गतिविधियों को जारी रखना हमारे पिछले साल के आदेश की अवमानना होगी। गौरतलब है कि पिछले साल 26 अप्रैल को सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया था कि किसी राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य के भीतर और उसके एक किलोमीटर के अंदर खनन की अनुमति नहीं होगी।
इस याचिका की सुनवाई कर रही थी अदालत
न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ बुधवार को एक याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें राजस्थान सरकार को अदालत के फैसले का कथित उल्लंघन करने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। पीठ में न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे। पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि हमे नहीं लगता कि महत्वपूर्ण बाघ निवास स्थान की सीमाओं से एक किमी के दायरे में खनन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए राज्य को किसी विशेष निर्देश की आवश्यकता है। मामले में अगली सुनवाई जुलाई में होगी।