खड़गे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। साथ पुराने पत्र में उठाई गई चिंता पर कुछ न किए जाने पर चिंता जताई है। दरअसल लोकसभा में कांग्रेस विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी जरूर है लेकिन पर्याप्त सांसद संख्या न होने से उसे वह दर्जा हासिल नहीं है।
खड़गे का कहना है कि इस अहम बैठक में उन्हें बतौर विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल होने को कहा गया है। कांग्रेस विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है। सदस्य का दर्जा मिले बिना उनके बैठक में जाने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि उनके पास कोई अधिकार नहीं होगा। न तो वे अपनी कोई राय रख सकेंगे और न ही मताधिकार होगा।
ऐसे में औपचारिकता पूरी से कोई फायदा नहीं है। उनका कहना है कि बहुत निराशाजनक कि उनके पूर्व में भेजे गए पत्र का कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। उन्होंने अपने पिछले पत्र में जो चिंता जताई थी उस पर भी ध्यान नहीं दिया गया है।
उनका कहना है कि सरकार दोहरा मानदंड अपना रही है। दिल्ली पुलिस एक्ट में संशोधन के लिए वह अध्यादेश लेकर आई और बिना विपक्ष की भूमिका उसे पूरा कर लिया। ऐसे में अगर सरकार अगर सबसे बड़ी पार्टी की उपेक्षा कर ऐसा करना चाहती है तो इसके लिए भी अध्यादेश ले आए। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आपकी सरकार ने बीते चार साल गवां दिए हैं। विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी की उपेक्षा करने से साबित होता है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने को इच्छुक नहीं है। जबकि कानून के मुताबिक लोकसभा में विपक्षी पार्टी का सदस्य चयन समिति की बैठक में शामिल किया जाना चाहिए।