फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कौड़ियों के भाव में मिली जमीन तो इलाज मुफ्त में क्यों नहीं कर सकते निजी अस्पताल: सुप्रीम कोर्ट

Thu, 28 May 2020 07:07 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • याचिका में न्यूज रिपोर्ट का हवाला देकर निजी अस्पतालों पर भारी भरकम बिल वसूलने का  हैआरोप 
  • इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते के भीतर याचिका का जवाब देने को कहा है
  • कोर्ट वकील सचिन जैन की याचिका पर सुनवाई कर रही है
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से कहा कि उन निजी अस्पतालों की पहचान की जाए, जहां कोविड-19 मरीजों का मुफ्त या कम से कम खर्च में इलाज किया जा सके। कोर्ट ने कहा कि जिन अस्पतालों को मुफ्त या कौड़ियों के भाव में जमीनें दी गई हैं, वहां कोरोना मरीजों का इलाज मुफ्त या नाममात्र दरों पर क्यों नही होना चाहिए।
विज्ञापन


चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को एक हफ्ते के भीतर याचिका का जवाब देने को कहा है। कोर्ट वकील सचिन जैन की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें देशभर के निजी या कारपोरेट अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए लागत संबंधी नियमों की मांग की गई है।

याचिका में न्यूज रिपोर्ट का हवाला देकर निजी अस्पतालों पर भारी भरकम बिल वसूलने का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि जब देश महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहा है, तब निजी अस्पताल जो सार्वजनिक जमीन पर चल रहे हैं और धर्मार्थ संस्थानों की श्रेणी में हैं, उन्हें इन मरीजों का मुफ्त में इलाज करने के लिए कहा जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि अन्य निजी अस्पतालों की दरों को भी सरकार द्वारा ‘निश्चित लागत के आधार’ पर विनियमित किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें