सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि घर के अंदर हुई मौत की जिम्मेदारी वहां रहने वालों की होगी। कोर्ट ने पत्नी की हत्या के दोषी गौर आचार्य की उम्रकैद बरकरार रखी। कोर्ट ने फरार दोषी को तुरंत गिरफ्तार करने के लिए त्रिपुरा पुलिस को आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कोई अपराध घर की चारदीवारी के भीतर होता है, तो वहां रहने वाले लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वे ठोस कारण बताएं कि पीड़ित की मौत कैसे हुई। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने एक मामले में गौर आचार्य की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। मामले में गौर को अपनी पत्नी सोमा आचार्य की हत्या और उसे प्रताड़ित करने का दोषी पाया गया है। गौर आचार्य पर IPC की धारा 302 के तहत अपनी पत्नी सोमा आचार्य की हत्या करने और धारा 498A के तहत उसके साथ क्रूरता करने का आरोप था।
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कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि गौर अपनी पत्नी के शरीर पर मौजूद चोटों के निशानों का कोई उचित स्पष्टीकरण नहीं दे सका। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घर के अंदर होने वाले अपराधों में शुरुआती जिम्मेदारी भले ही पुलिस और अभियोजन पक्ष की हो, लेकिन घर के सदस्यों को भी मौत की सही वजह बतानी होगी। कोर्ट ने इस मामले को समाज के लिए एक सबक बताया।
क्या है मामला?
मामले में बेंच ने पाया कि, सोमा की शादी के कुछ ही दिनों बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा था। उसने कई बार अपने माता-पिता से बचाने की गुहार लगाई और वह कुछ दिन अपने मायके भी रही। लेकिन हर बार समाज के डर से समझौता कराकर उसे वापस ससुराल भेज दिया गया। गांव के बुजुर्गों ने भी सुलह कराई, लेकिन सोमा का अंत दुखद रहा। कोर्ट ने कहा कि सोमा के अपनों को लगा कि स्थिति सुधर जाएगी, लेकिन उनकी उम्मीदें टूट गईं।
मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम से पता चला कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी। सोमा को मार कर लटकाया गया था। जब सोमा की लाश मिली, तब गौर उसी घर में मौजूद था। उसने गवाहों को बताया कि सोमा ने आत्महत्या की है, लेकिन वह चोटों के निशान के बारे में कुछ नहीं कह पाया। कोर्ट ने गौर की इस दलील को खारिज कर दिया कि यह आत्महत्या का मामला है।
इस मामले में निचली अदालत ने गौर के पिता को बरी कर दिया था। हाई कोर्ट ने उसकी मां और भाई को भी हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया था क्योंकि वे उसी परिसर में अलग झोपड़ी में रहते थे। सुप्रीम कोर्ट ने अब गौर की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है। गौर फिलहाल फरार है, इसलिए कोर्ट ने त्रिपुरा के डीजीपी को तुरंत एक टीम बनाने और उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।