पीठ ने अपने आदेश में कहा कि राज्यपालों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। राज्यपाल किसी राजनीतिक विचारधारा या किसी मत का समर्थक नहीं होता। राज्यपाल से यह उम्मीद की जाती है कि वह सांविधानिक मान्यताओं के अनुरूप अपनी भूमिका निभाएं। सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन कमलनाथ सरकार को सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए कहा था। 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी।
राज्यपाल खुद निर्णय नहीं ले सकते कि सरकार के पास बहुमत है या नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट कराने के राज्यपाल लालजी टंडन के आदेश को सही ठहराया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्यपाल खुद यह निर्णय नहीं ले सकते कि मौजूदा सरकार के पास बहुमत है या नहीं। जरूरत इस बात की है कि अपने अधिकार का इस्तेमाल करते वक्त राज्यपाल को यह ध्यान में रखना चाहिए कि चुनी हुई सरकार को गिराने की मंशा के साथ यह कदम न उठाया जाए।
राज्यपाल को तब दखल देना चाहिए जब उन्हें ऐसा महसूस हो कि सरकार अपना बहुमत खो चुकी है। कोर्ट ने कहा है कि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फ्लोर टेस्ट का आदेश देते वक्त राज्यपाल का किसी खास राजनीतिक दल के प्रति झुकाव न हो।
मध्य प्रदेश विधानसभा की मौजूदा स्थिति
- 2 विधायकों के निधन के चलते कुल सीटें : 228
- इस्तीफा देने वाले कांग्रेस और भाजपा के विधायक : 23
- इस्तीफे मंजूर होने के बाद सदन में सीटें (228-23) : 205
- बहुमत का आंकड़ा : 103
- भाजपा = 106
- कांग्रेस+ = 92
- अन्य : 07