सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) में बड़ी संख्या में रिक्त पदों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि पूरा ट्रिब्यूनल ढह गया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि जिन पीठों में रिक्तियां हैं वो भौतिक या हाइब्रिड मोड से काम कर रही हैं। इसके लिए उनमें अन्य पीठों से सदस्यों को जोड़ा जा रहा है।
न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और सूर्यकांत ने कहा कि अगर ट्रिब्यूनल के बचे हुए 27 सदस्य भी सेवानिवृत्त हो जाते हैं तो यह पूरी तरह से ढह जाएगा। पीठ ने कहा कि अगर नियुक्तियां नहीं की जाती हैं तो फिर ट्रिब्यूनल किस तरह काम करेगा। आपने (केंद्र) अप्रैल 2022 में विज्ञापन दिया था और स्पष्ट है कि चयन करने में भी कुछ समय लगेगा।
पीठ ने सुझाव दिया है कि रिक्त पदों की बड़ी संख्या देखते हुए कैट के सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाना चाहिए।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कैट में अनुमति प्राप्त क्षमता 69 न्यायाधीशों की है और केवल 27 न्यायाधीश पदों पर हैं। ट्रिब्यूनल में चेयरपर्सन के साथ 43 पद रिक्त हैं। पीठ ने कहा कि रिक्तियों का सर्कुलर चार अप्रैल 2022 को जारी किया गया था। केंद्र सरकार का कहना है कि कैट में नियुक्तयों की प्रक्रिया जुलाई तक पूरी होने की उम्मीद है।