जयसिंह ने कोर्ट को बताया कि छात्रों के खिलाफ गंभीर हिंसा की गई। उनमें से कई के हाथ और पैर भी टूट गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने तीस हजारी कोर्ट परिसर में वकीलों और पुलिस के बीच भिड़ंत का हवाला देते हुए कहा, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए आदेश पारित किए थे।
उन्होंने कहा, कोई भी प्रदर्शनों को रोक नहीं सकता। हम किसी भी तरह की हिंसा नहीं चाहते हैं। ये दंगे जानबूझकर छात्रों के खिलाफ कराए गए। वहीं, गोंसाल्विस ने बताया कि वह अस्पताल और लॉकअप गए थे, जहां पुलिस ने छात्रों को रखा था।
बेंच के सामने याचिकाकर्ता ने पुलिस द्वारा हिंसा का कथित वीडियो होने की भी बात कही। जवाब में सीजेआई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि यह कोर्ट रूम है, यहां शांति से अपनी बात रखनी होगी।
वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया में पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता ने जामिया में हुई हिंसा की न्यायिक जांच करने की मांग की। साथ ही कहा कि हिरासत में लिए गए घायल छात्रों को मेडिकल सुविधा और मुआवजा दिया जाए।
हालांकि, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे कोर्ट तक रजिस्ट्री के माध्यम से ही पहुंचें।
नागरिकता कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कल
इस बीच, नागरिकता कानून को चुनौती देने संबंधी कांग्रेस समेत सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा। जिन लोगों ने याचिका दी है, उनमें त्रिपुरा के पूर्व महाराजा प्रद्योत किशोर देब बर्मन और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश भी हैं।
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ ने कहा, इन याचिकाओं को दूसरे मामलों के साथ 18 दिसंबर को सुना जाएगा। इस बीच, अभिनेता और नेता कमल हासन की पार्टी एमएनएम ने भी नए नागरिकता कानून के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है।